आने वाले समय में भूकम्प से इन्दौर भी सुरक्षित नहीं: पर्यावरणविद डॉ. ओपी जोशी

18 मार्च 1938 को 6.9 तीव्रता का भूकंप आया था इन्दौर में
इंदौर। शहर के प्रसिद्ध पर्यावरणविद और गुजराती साइंस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ ओ पी जोशी ने बताया कि हाल ही में उत्तर भारत के दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर में 6.9 तीव्रता से आए भूकंप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा तक हिल गए। ऐसे में इन्दौर को भी सचेत हो जाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि 14 मार्च 1938 को इन्दौर में 6.9 तीव्रता का भूकंप आया था। वर्ष 2011 में बदनावर, सीहोर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रूनिजा एवं खरगोन में भूमिगत हलचल एवं धमाके हुए थे, जिनके अलग-अलग कारण भी बताए गए थे। शहर के आसपास स्थित माचल, माचला, जोशी गुराडिय़ा एवं कस्तुरबा ग्राम में भी कम्पन्न एवं धमाकों की घटनाएं पिछले 20-21 वर्षों में हुई है। शहर के पश्चिम भाग में स्थित सुदामा नगर तथा चंदन नगर में भी कई बार धमाकों की गूंज हुई है। प्रसिद्ध भू-वैज्ञानिक डॉक्टर जनार्दन नेगी ने 1994 में कहा था कि इन्दौर, खंडवा, रतलाम, ग्वालियर और देवास में आए ये भू-गर्भीय धमाके भविष्य के लिए किसी बड़े भूकंप का भी संकेत हो सकते हैं। हालांकि उस समय कोई जन-धन का नुकसान नहीं था। 83 वर्ष पहले इन्दौर भी एक छोटा सा ही शहर होगा और बहुत कम क्षेत्र में फैला होगा और आबादी भी कम होगी, लेकिन आज इन्दौर बहुत फैल चुका है और आबादी भी बढ़ गई। साथ ही इन्दौर में कई तरह के प्रोजेक्ट और कन्स्ट्रक्शन का कार्य चल रहा है। जैसे मेट्रो ट्रेन परियोजना, हाई राईज बिल्डिंग आदि। दिल्ली, बेंगलुरू, गोहाटी, जबलपुर आदि शहरों में माइक्रो झोनेसन पद्धति बन चुकी है, जिससे यह पता चलता है कि कहां पर जमीन कमजोर हैं और कहां निर्माण कार्य किया जा सकता है।

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