कठिन डगर पर है कॉरिडोर… 306 करोड़ के टेंडर हो गए, डिजाइन तय ही नहीं

पीडब्ल्यूडी-आईडीए और भाजपा-कांग्रेस में डिजाइन को लेकर मची खींचतान
विनोद शर्मा, इंदौर। सर्वे, डिजाइन, मेट्रो क्रॉसिंग, राशि आवंटन और ठेके की पात्रता को लेकर विवादों में उलझे रहे एलआईजी-नवलखा एलिवेटेड कॉरिडोर की राह अभी कठिन है। बाधित बिजली लाइन की शिफ्टिंग को लेकर टेंडर हो चुके हैं। वहीं अभी इस बात पर फैसला होना बाकि है कि आखिर कॉरिडोर किस डिजाइन के आधार पर बनेगा। 2016 में इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा सबमिट की गई डिजाइन के आधार पर या फिर कांग्रेस सरकार की तैयार डिजाइन पर।

एलिवेटेड कॉरिडार के लिए सबसे पहले चिंता प्राधिकरण ने की थी जब अध्यक्ष शंकर लालवानी थे जो अभी सांसद हैं। उन्होंने 2016 में 80 लाख रुपए की लागत से सर्वे कराया। डिजाइन बनवाई थी। डिजाइन एलिवेटेड बीआरटीएस कॉरिडोर की थी। इसी डिजाइन को पूर्व लोक निर्माण मंत्री सज्जनसिंह वर्मा ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष प्रस्तुत किया था। इसी डिजाइन के आधार पर प्रोजेक्ट मंजूर हुआ। हालांकि मंजूरी के बाद कांग्रेस सरकार और पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने डिजाइन खारिज कर दी। उनका कहना था कि डिजाइन बेतूकी है। एलिवेटेड बीआरटीएस बनेगा तो लोग बस तक कैसे पहुंचेंगे। इसीलिए पीडब्ल्यूडी ने नई डिजाइन बनाई। जिसमें बस लेन नीचे कर दी। बाकि गाड़ियां ऊपर।

अब जबकि बिजली शिफ्टिंग के टेंडर हो चुके हैं। अगस्त तक लाइन शिफ्ट हो जाएगी। चूंकि एलिवेटेड कॉरिडोर के टेंडर हो चुके हैं। लिहाजा यही माना जा रहा है कि कॉरिडोर पर 2021 खत्म होने से पहले काम शुरू हो जाएगा। हालांकि अब तक आईडीए और पीडब्ल्यूडी के बीच दो साल तक चले डिजाइन विवाद सुलझा नहीं है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर कॉन्ट्रेक्टर कंपनी से किस डिजाइन के आधार पर निर्माण कराया जाएगा।

क्योंकि सांसद कर चुके हैं विरोध…
पूर्व मंत्री वर्मा के डिजाइन बदलाव प्रस्ताव पर सांसद शंकर लालवानी ने विरोध किया था। उनका कहना था कि आईडीए की डिजाइन श्रेष्ठ थी उससे लोक परिवहन व्यवस्थित रहता। अन्य वाहन भी प्रभावित नहीं होते।

यह है अलाइनमेंट…
एलआईजी से
0.680 किमी इंडस्ट्री हाउस तिराहा
0.950 किमी ग्रेटर कैलाश तिराहा
1.300 किमी पलासिया चौराहा
1.790 किमी गीताभवन चौराहा
2.540 किमी शिवाजी प्रतिमा
3.26 किमी छावनी
3.75 किमी इंदिरा प्रतिमा
4.85 किमी नवलखा

पीडब्ल्यूडी ने इसे बदला और तय किया…
पीडब्ल्यूडी की डिजाइन नवंबर 2019 में फाइनल हुई। इसके अनुसार कॉरिडोर की लंबाई 6 किलोमीटर है। ऊंचाई करीब 9-10 मीटर होगी। जहां मेट्रो क्रॉसिंग वहां ऊंचाई 8 मीटर से कम रहेगी। जबकि चौड़ाई करीब 15 मीटर। फोरलेन। 7-7 मीटर में दो-दो लेन के सेपरेटर होंगे। बीआरटीएस के स्पॉन पर 30-30 मीटर स्पॉन होगा। शिवाजी वाटिका चौराहे पर एग्री कल्चर कॉलेज की ओर, गीताभवन पर ढक्कनवाला कुआं की ओर और गिटार तिराहा पर ग्रेटर कैलाश की ओर कुल तीन भुजाएं प्लान की गइ्र। इनकी लंबाई 250 से 300 मीटर प्लान की गई।

ऐसी थी प्राधिकरण की डिजाइन…
1. कुल लंबाई 4.85 किमी। इस हिस्से में रोड की कुल चौड़ाई 31 मीटर है। इस पर 19.5 मीटर चौड़ा एलिवेटेड प्लान है। दोनों छोर पर 3.5-3.5 मीटर में बसें चलना है। बीच के 11 मीटर में मिश्रित वाहन। बीच में नॉइस बेरियर बनना था।
2. ऐसा कॉरिडोर जो एलआईजी से शुरू हो और नवलखा तक रहे। बसें ऊपर चले। यात्रियों के पहुंचने के लिए एस्केलेटर युक्त फुट ओवर ब्रिज बने। मिक्स लेन में वही वाहन चले जिन्हें एलआईजी से सीधे नवलखा या भंवरकुआं जाना है।
3. अन्य वाहन मौजूदा कॉरिडोर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे जाम का संकट दूर होगा। बसों की टाइमिंग कम होगी। 4.85 किमी का सफर 5 मिनट में पूरा होगा।

अब ऐसी हो सकती है डिजाइन
– कॉरिडोर बनेगा 4.85 किमी। एलआईजी से नवलखा के बीच तीन तिराहे (इंडस्ट्री हाउस, ग्रेटर कैलाश और इंदिरा प्रतिमा) हैं जबकि चार चौराहे (पलासिया, गीताभवन, शिवाजी प्रतिमा, जीपीओ) हैं।
– पलासिया, इंदिरा प्रतिमा और शिवाजी प्रतिमा को भूजाओं के माध्यम से जोड़ा जा सकता है।
– ऐसा होता है तो कोने से बस लेन भी हटेगी। बस लेन बीच में आएगी। ऐसे में यात्रियों को मिक्स लेन क्रॉस करके बस पकड़ना मुश्किल होगा।

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