कल से मप्र हाई कोर्ट व अधीनस्थ न्यायालयों में शुरू होगी फिजिकल सुनवाई

गुजरात व हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भी जारी की एसओपी
मांगीलाल चौहान, इंदौर। मप्र, गुजरात व हिमाचल प्रदेश की हाई कोर्ट ने कोरोना महामारी की वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए एसओपी (स्टैंडिंग आपरेटिंग प्रोसीजर) जारी की हैं ताकि हाईकोर्ट व अधीनस्थ न्यायालयों में पूरी तरह फिर से फिजिकल तौर पर कामकाज शुरू किया जा सके।

मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने हाईकोर्ट की विशेष समिति की सिफारिशों पर विचार करने और बार संघों के साथ विचार-विमर्श के बाद मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। मानक संचालन प्रक्रिया 15 फरवरी से लागू होगी। यद्यपि हाई कोर्ट में एक सप्ताह से फिजिकल सुनवाई छुटपुट शुरू हो चुकी है किंतु एसओपी जारी होने के बाद अब सोमवार से पूरी तरह शुरू हो जाएगी। हालाकि वकील के चाहने पर वर्चुअल सुनवाई भी जारी रहेगी।

मप्र हाई कोर्ट द्वारा जारी एसओपी
मप्र हाई कोर्ट द्वारा जारी एसओपी के अनुसार उन मामलों की सुनवाई जिनमें तत्काल सुनवाई के लिए आवेदन दायर किए गए हैं, प्रिंसिपल सीट जबलपुर और इसकी इंदौर व ग्वालियर स्थित बेंच में डिफॉल्ट रूप 15 फरवरी से फिजिकल मोड में शुरू हो जाएगी, जबकि वर्चुअल सुनवाई केवल संबंधित अधिवक्ता व याचिकाकर्ता के अनुरोध पर आयोजित की जाएगी। जो अधिवक्ता 65 वर्ष से अधिक आयु हैं वे विशेषतौर पर और अन्य अधिवक्ता-याचिकाकर्ता रजिस्ट्री को दी गई अग्रिम सूचना के आधार पर वर्चुअल मोड के माध्यम से पेश हो सकते हैं।

नए मामलों को फिजिकल मोड के माध्यम से दायर करते समय अधिवक्ता- याचिकाकर्ता मामले के ”सूचकांक” पृष्ठ में इसका उल्लेख करते हुए वर्चुअल मोड के माध्यम से सुनवाई के लिए अपना अनुरोध प्रस्तुत कर सकते हैं। ई-फाइलिंग मोड के माध्यम से दायर किए जाने वाले ताजा मामलों में वकील व याचिकाकर्ता फाइलिंग के समय वर्चुअल मोड के माध्यम से सुनवाई के लिए अपना अनुरोध प्रस्तुत कर सकते हैं। ई-फाइलिंग सॉफ्टवेयर में वर्चुअल सुनवाई के लिए अनुरोध का विकल्प दिया गया है। यदि किसी विशेष मामले में एक से अधिक अधिवक्ता हैं, तो एक फिजिकल रूप से पेश हो सकता है और अन्य वर्चुअल मोड से,इसके लिए उपरोक्त तरीके से अनुरोध करना होगा।

हर गुरुवार को अंतिम सुनवाई
सुनवाई की तारीख पर हियरिंग के मोड को नहीं बदला जाएगा। आमतौर पर हर गुरुवार को मामलों की फिजिकल तौर पर अंतिम सुनवाई की जाएगी जिसमें केवल रिट अपील, रिट याचिकाओं, आपराधिक अपील और सिविल अपील की अंतिम सुनवाई की जाएगी। वरीयता उन आपराधिक अपीलों को दी जाएगी, जिसमें अपीलकर्ता/आरोपी व्यक्ति जेल में हैं। अंतिम सुनवाई के लिए मामले को सूचीबद्ध करने के लिए सभी संबंधित मामले के पक्षकार या उनके अधिवक्ताओं की लिखित सहमति आवश्यक है। किसी पक्ष या उनके अधिवक्ता की सहमति के अभाव में मामले को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा प्रिंसिपल सीट जबलपुर व इसकी इंदौर-ग्वालियर बेंच की हाई कोर्ट बार एसोसिएशन को प्रोटोकॉल के मानदंडों का कड़ाई से पालन करना होगा। इसी तरह गुजरात व हिमाचल प्रदेश की हाई कोर्ट ने भी एसओपी जारी की है।

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