जिला खाद्य नियंत्रक मीणा को खोज नहीं सकी पुलिस

23 फरार राशन माफियाओं के लाइसेंस-पासपोर्ट होंगे निरस्त
इंदौर। भरत दवे और श्याम दवे के साथ 80 लाख रुपए के राशन घोटाले को अंजाम देने वाले उन राशन माफियाओं के ड्राइविंग लाइसेंस, आम्र्स लाइसेंस और पासपोर्ट निरस्त होंगे। इसके लिए मामले की जांच कर रही एसआईटी के चीफ राजेश व्यास ने संबंधित महकमों को चिट्ठी लिख दी है। इसके साथ ही आरोपितों पर ईनाम घोषित करने की कागजी कवायदें भी चल पड़ी है।

कलेक्टर मनीष सिंह ने जनवरी के दूसरे सप्ताह में राशन घोटाला उजागर किया था। सरकारी रिपोर्ट के आधार पर छह थानों में राशन माफियाओं और उनका साथ देने वाले पूर्व खाद्य आपूर्ति नियंत्रक आर.सी.मीणा सहित 31 लोगों के खिलाफ केस दर्ज है। श्याम दवे और भरत दवे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत् जेल में बंद है। धीतेश दवे, कमलेश कनाड़े, धर्मेंद्र पुरोहित भी गिरफ्तार हैं। अभी दलबार सिंह (महालक्ष्मी बाई सहकारी साख संस्था), रमेश सिंह दरबार, ललित दयाराम, आरसी मीणा(जिला आपूर्ति नियंत्रक), सुनील चौधरी, विवेक पुरुषोत्तम, दिलीप गौड़, अंजू अशोक कुमार, राकेश मोहनलाल,पवन दिनेश, तुलावती भाटमरे, अनिता, अनिल पालीवाल, राजेश पालीवाल,कांता देवी, विजया, अखिलेश शिंदे, कमल शर्मा, पन्नाालाल, राहुल चौधरी, आशा, चंद्रिका फरार है।

एएसपी (पश्चिम-1) राजेश व्यास के मुताबिक मामले में शुक्रवार शाम एसआइटी सदस्यों की बैठक कर प्रकरणों की जानकारी ली गई। बैठक में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। कहा कि जो पकड़ में नहीं आते उनका फरारी पंचनामा बनाएं और ईनाम घोषित करे। आरोपितों का ड्राइविंग व आर्म्स लाइसेंस और पासपोर्ट निरस्त करने के लिए भी कहा। यह भी निर्देश दिए कि जो आरोपित रासुका के तहत जेल में बंद है, उन्हें मूल अपराध में गिरफ्तार कर घोटाले के संबंध में पूछताछ की जाएं।

कर्मचारी भी बनेंगे आरोपी…
घोटाला वर्षों से चल रहा था। ऐसे में सरकारी कर्मचारी व अधिकारियों की भूमिका से इन्कार नहीं कर सकते। खाद्यान्न् आवंटित और समय-समय पर परीक्षण करने वाले अधिकारियों की भूमिका तय की जाएगी। जिन संस्थानों को अनाज बेचा, उनको भी आरोपित बनाया जाएगा।

बैंक खातों और मोबाइल कॉल डिटेल की जांच
आरोपितों के बैंक खातों और मोबाइल की जांच कर कालाबाजारी में लिप्त आरोपित और खाद्यान्न् खरीदने वाले व्यापारियों के तार जोड़े जाएंगे। उन हितग्राहियों को गवाह बनाया जाएगा, जिनके फर्जी हस्ताक्षर से घोटाला हो रहा था।

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