ठाकरे हत्याकांड : लसूडिया पुलिस की लापरवाही की पराकाष्ठा

8 साल से फरार आरोपी की रिपोर्ट पेश नहीं कर पा रही पुलिस
इंदौर। शहर के चर्चित तुलसी नगर रहवासी संघ के अध्यक्ष संजय ठाकरे हत्याकांड में पुलिस की लापरवाही व कमजोर इन्वेस्टिगेशन के कारण बरी हुए नौ आरोपियों के बाद भी पुलिस गंभीर नहीं है। कोर्ट ने फैसले में जहां आईजी को दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही थी वहीं लसूडिया पुलिस को केस में आठ साल से फरार आरोपी के मामले में एक हफ्ते में प्रगति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। स्थिति यह है कि दो माह बाद भी पुलिस ने कोर्ट में रिपोर्ट पेश नहीं की है।

भूमाफियाओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले संजय ठाकरे की 1 अप्रैल 2011 को कॉलोनी के पास ही उनकी ही कार में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में पुलिस ने तत्कालीन सरपंच पति हेमलता पति किशोर पटेल, कमलेश वर्मा, सोनू पटेल, राहुल, राजकुमार, राहुल चौधरी, विनय पांडे, कमल पटेल, वीरेंद्र चौधरी और बलविंदर के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर गिरफ्तार किया था। इनमें से बलविंदर शुरू से ही फरार रहा। इधर, 9 साल चली सुनवाई के बाद 14 दिसम्बर 2020 को कोर्ट ने सरपंच पति किशोर पटेल सहित सभी नौ आरोपियों को दोष सिद्ध न होने पर बरी कर दिया था। केस की सबसे कमजोर पक्ष पुलिस इन्वेस्टिेशन रहा जिसमें पुलिस परिवार के गवाहों के अलावा अन्य खास गवाह पेश नहीं कर सकी। फोरेंसिक जांच जहां कमजोर रही वही सबूतों की कड़ी भी नहीं मिली। इसके चलते सभी आरोपी बरी हो गए। इसे लेकर केस से जुड़े सभी तत्कालीन अधिकारियों पर उंगली उठी। केस के बाद तत्कालीन आईजी योगेश देशमुख ने कहा था कि अभी कोर्ट के आदेश की प्रति नहीं मिली है। वे केस से जुड़े अधिकारियों-पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कराएंगे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। इस बीच लेतलतीफी हुई और उनका भी तबादला हो गया।

इस मामले में कोई पत्र या आदेश नहीं मिला
कोर्ट ने फैसले में कड़ी टिप्पणी के साथ दिए गए आदेश कहा था की सीआरपीसी की धारा 173(8) के प्रावधानों के अनुसार जांच को एक संदिग्ध बलविंदरसिंह के खिलाफ खुला रखा गया है जिसे फरार बताया जाता है। उसको फरार दिखाने वाली अंतिम चार्जशीट अभियोजन पक्ष द्वारा 9 जुलाई 2012 को कोर्ट में दायर की गई है लेकिन 8 साल से ज्यादा समय होने के बाद उसके संबंध में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। कोर्ट ने कहा था कि इसके लिए एसएचओ, पीएस लसूडिया को पत्रचार भेजा जाए और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट इंदौर को समर्थन दिया जाए। इसके साथ ही मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष 7 दिनों की अवधि में जांच के संबंध में हुई प्रगति रिपोर्ट दर्ज करने को कहे जो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करेंगे। कोर्ट के इस आदेश के बाद दो महीने बीत चुके हैं लेकिन अभी तक पुलिस ने प्रगति रिपोर्ट पेश नहीं की है। मामले में टीआई इंद्रमणि पटेल का कहना है कि अभी तक उन्हें इस मामले में कोई पत्र या आदेश नहीं मिला है।

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