डिग्री में ‘जीपी’ लिखे होने से विद्यार्थियों का टूटता है मनोबल: मंत्री मोहन यादव

इंदौर। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के मध्य भारत प्रांत का 53वां प्रांतीय अधिवेशन हुआ। मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने कहा कि संक्रमण के बीच परीक्षा करवाने में एबीवीपी की अहम भूमिका रही है। पहले बाकी राज्यों की तरह विद्यार्थियों को जनरल प्रमोशन दिए जाने पर विचार हो रहा था, लेकिन कई शिक्षाविद् ने इसका यूजी फाइनल और पीजी फाइनल सेमेस्टर में विरोध किया।
उन्होंने कहा कि डिग्री में ‘जीपी’ यानी जनरल प्रमोशन लिखा होगा तो विद्यार्थियों का मनोबल टूटेगा, क्योंकि कंपनियों में बगैर परीक्षा के विद्यार्थियों के मूल्यांकन को सही नहीं माना जाता है। फिर शासन के सामने यूजी फर्स्ट-सेकंड ईयर में जनरल प्रमोशन और फाइनल ईयर में ओपन बुक परीक्षा का विकल्प आया। यहां तक संगठन ने सात अलग-अलग प्रकार से विद्यार्थियों का मूल्यांकन करने का सुझाव दिया। बाद में सहमति बनते ही प्रदेश में परीक्षा करवाई गई। सभी विश्वविद्यालय ने अच्छे ढंग से इन्हें संचालित भी किया। प्रदेश का यह प्रयोग बाकी राज्यों को भी काफी पसंद आया, जिन्होंने परीक्षा के इस मॉडल को अपने राज्यों में लागू किया।
रविवार को अधिवेशन में 35 जिलों के 800 से ज्यादा कार्यकर्ता अधिवेशन में आए, जिन्होंने अधिवेशन का शुभारंभ ध्वजारोहण से की। खास बात यह थी कि संगठन से निकले पूर्व पदाधिकारी, छात्र नेता और सदस्य भी आए। अधिवेशन में एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी निर्णय लिया गया, जिसमें मालवा और मध्य भारत प्रांत अलग-अलग करने पर जोर दिया। जहां आगे से दोनों प्रांत की स्वतंत्र रूप से गतिविधियां संचालित होगी। वैसे मालवा-मध्य भारत प्रांत का संयुक्त रूप से यह आखिरी अधिवेशन है। कार्यक्रम में मंत्री यादव ने कहा कि नई शिक्षा नीति को लागू करने को लेकर सरकार काफी गंभीर है। शैक्षणिक संस्थानों के अलावा विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा को लेकर नई दिशा मिलेगी। राष्ट्रीय मंत्री गजेंद्र तोमर, प्रांतीय अध्यक्ष मनोज आर्य, योगेश रघुवंशी, शालिनी वर्मा, धनश्याम चौहान मंच पर बैठ थे। पर्यटन मंत्री उषा ठाकुर, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, विधायक मालिनी गौड़ व भाजपा नेता भी मौजूद थे। संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि शनिवार को 35 जिलों से आए कार्यकर्ताओं की गतिविधियों को लेकर एक फोटो प्रदर्शनी भी लगाई है। अधिवेशन में तीन प्रस्ताव पारित किए गए, जिसमें वर्तमान परिदृश्य, शैक्षणिक परिदृश्य और आत्मनिर्भर भारत शामिल थे। अंत में संगठन की नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई।

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