दो दशक से ज्यादा समय से चल रही थी जमीन की जादूगीरी

कई अधिकारी आकर चले गए लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं, बस ऊपरी
आदेश के बाद ही पुलिस करती रही खानापूर्ति
45 संस्थाओं ने भी 252 एकड़ जमीन की हेराफेरी की
इंदौर। गृह निर्माण संस्थाओं की जमीनों में हेराफेरी का खेल खालसा कॉलेज से लेकर खजराना तक चर्चा में है। 2009 में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के नेतृत्व में ही संस्था संचालकों को सबक सीखाने का अभियान शुरू हुआ था। कुछ को सबक मिला भी, लेकिन आधा-अधूरा। अब जिस अंदाज में कलेक्टर मनीष सिंह भू-माफियाओं से निपट रहे हैं उसने मायूस हो चुके पीड़ितों को फिर हौंसला दिया है। अयोध्यापुरी और पुष्पविहार के जमीनी सौदे उजागर होने के बाद अब अन्य संस्थाओं की परतें भी उधड़ रही हैं, जिनकी जमीनों की बड़े पैमाने पर हेराफेरी हुई है।

जागृति गृह निर्माण संस्था ने राजगृ़ही कॉलोनी काटी। सदस्यों को जिस जमीन पर प्लॉट दे दिए थे, उसका सौदा बॉबी छाबड़ा की संस्था सविता गृह निर्माण संस्था से कर दिया। कुछ जमीनें दीप-गणेश संस्था को भी बेची। 2009 में भूमाफियाओं के खिलाफ चलाए गए अभियान में तमाम घोटाले सामने आ चुके हैं। आज तक न तो बेची गई जमीन वापस ली जा सकी और न ही सदस्यों को उनका हक मिल पाया है। पिछले वर्षों में प्रशासन तक पहुंची शिकायत के अनुसार 45 संस्थाओं ने 252 एकड़ जमीन की अफरातफरी की है। इन जमीनों का औसत मुल्य 4704.48 करोड़ है। इनमें छह संस्थाओं ने अवैध तरीके से 1341.64 करोड़ की 77 एकड़ जमीन बेची गई। वहीं 39 संस्थाओं ने सहकारिता विभाग की कथित अनुमति के आधार पर 175 एकड़ जमीन बेची है जिसकी कीमत 3049.20 करोड़ है। इसके अलावा करीब 100 एकड़ ऐसी जमीनें ऐसी हैं जिनके सौदे तो हुए हैं लेकिन उनकी जानकारी सहकारिता विभाग को है, न ही प्रशासन को। निपानिया और पिपल्याकुमार के साथ खजराना गांव में इन जमीनों को देश-दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों ने खरीदकर अपने हाउसिंग और कमर्शियल प्रोजेक्ट खड़े कर दिए हैं। आज इस जमीन की कीमत 1300 करोड़ से ज्यादा है। इनमें 14-14 मंजिला इमारतें तन चुकी है।

आईडीए की योजना की आड़ में हुए सौदे
गृह निर्माण संस्थाओं द्वारा काटी गई कॉलोनियों में सदस्यों को प्लॉटों का आवंटन तो कर दिया गया, लेकिन विधिवत रूप से कब्जा नहीं दिया गया। विकास शुल्क और तमाम तरह के भुगतान का दबाव बनाकर संस्था के कर्ताधर्ता सदस्यों को झुलाते रहे। इस बीच आईडीए ने योजना क्र. 132 लांच कर दी, जिसमें गृह निर्माण संस्थाओं की जमीनें भी आ गईं। योजना की आड़ में धंधेबाजों ने अपना फायदा शुरू कर दिया। सदस्यों को योजना का डर दिखाकर प्लॉट नहीं दिए और अवैधानिक रूप से जमीन निजी लोगों को बेचते रहे। इसी तरह आईडीए ने स्कीम-133 लागू की थी जिसमें पिपल्याकुमार की जमीन थी। स्कीम को आईडीए ने छोड़ दिया। इससे पहले जनकल्याण, बसंत विहार और सतगुरु गृह निर्माण संस्था जैसी कई संस्थाओं में जमीनें बिक चुकी थी। कई जमीनें बाद में बिकी। विवाद के कारण सहकारिता विभाग ने एनओसी बेक डेट में जारी करके दे दी।
निगम में ऐसी रही घुसपैठ- दीपक ने हिना पैलेस जो केवल वैध रूप से दो हेक्टेयर में थी, इसमें श्रीराम के साथ ही सारथी, हरियाणा व शताब्दी संस्था की जमीन भी शामिल कर 10 हेक्टेयर की अवैध बनाई। फिर नगर निगम से वैध कराने का आवेदन कर साल 2013 में फर्जी दस्तावेज से वैध करा ली।

इन संस्थाओं ने मनमाने ढंग
से बेची जमीन
देवी अहिल्या गृह निर्माण : 27.59 एकड़ जमीन
मित्रबंधु गृह निर्माण : 4.51 एकड़
वेदमाता गायत्री गृह निर्माण : 7.10 एकड़
विकास अपार्टमेंट सोसायटी : 9 एकड़
डाकतार गृह निर्माण संस्था : 1.93 एकड़
भाग्य लक्ष्मी गृह निर्माण : 3.823 एकड़
नवभारत गृह निर्माण : 6.782 एकड़
क्लॉथ मार्केट गृह निर्माण : 13 एकड़
जागृति गृह निर्माण (राजगृही) : 10 एकड़
जागृति गृह निर्माण (र्पाश्वकुंज : 6 एकड़
(इन संस्थाओं की जमीनें भी बिकी : मयूर गृह निर्माण, डायमंड गृह निर्माण, श्रीराम गृह निर्माण, हरियाणा गृह निर्माण, गणपति गृह निर्माण, ईषकृपा गृह निर्माण, गोमटेश गृह निर्माण, न्याय विभाग कर्मचारी व अन्य। इन सभी जमीनों की कीमतें 4000रुपए/वर्गफीट से कम नहीं है। )

छह एफआईआर में कुख्यात दीपक
माद्दा हमेशा बचता रहा
-जिस भूमाफिया दीपक माद्दा को रासुका में निरुद्ध किया गया है उसके कारनामे पुलिस-प्रशासनिक विभाग में कभी छिपे नहीं रहे। उसने सौदों के नाम कई कारनामे किए। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सभी छह एफआईआर में वह आरोपी है जबकि अन्य मामलों में जांच के बाद केस दर्ज किए जा सकते हैं।

-दीपक ने नंदानगर सहकारी संस्था में मजदूर पंचायत संस्था का खाता खुलवाया। अपने भाई कमलेश जैन और संस्था के अध्यक्ष दीपेश वोरा के साथ मिलकर संस्था की दो हेक्टेयर जमीन केशव नाचानी और ओमप्रकाश धनवानी को साल 2006 में बेचा। इसमें दो करोड़ का सौदा था, लेकिन 50 लाख के चेक ही संस्था के खाते में आए, डेढ करोड़ मददा को नकद मिले।

-ऐसे ही सिटी बैंक के अपने खाते में मद्दा ने 54 लाख रुपए मजदूर पंचायत से लिए। उसने हिना पैलेस से जुडी श्रीराम संस्था की पांच हेक्टेयर जमीन इसी सौदे से मिली 1.60 करोड़ की राशि से उसी साल 2006 में खरीद ली।

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