नाबालिग अपराधियों से मंडराता खतरा दो साल बाद भी सेफ्टी वॉल अधूरी

इंदौर। शहर में तेजी से बढ़ रहे अपराधों में लिप्त नाबालिगों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। विडम्बना यह कि इनके द्वारा घटित अपराधों के बाद जब इन्हें बाल सम्प्रेक्षण गृह व विशेष गृह बालक में रखा जाता है तो वहां भी स्थितियां अनुकूल नहीं हैं। इन दोनों गृहों में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था का अभी भी अभाव है जबकि यहां पहले कई बार इनके हमला कर भागने की घटनाएं हो चुकी हैं। खास बात यह कि विशेष गृह बालक में गंभीर अपराधों में लिप्त रहे नाबालिगों के साथ सामान्य अपराध करने वाले बाल अपराधियों को रखा गया है जो उलट गलत राह पर जा सकते हैं। एक साथ आठ अपचारी बालकों द्वारा गार्ड पर हमले की घटना के बाद यहा सेफ्टी वॉल का निर्माण शुरू किया लेकिन वह बजट के अभाव में दो साल बाद भी अधूरी है।

दरअसल, विशेष गृह बालक व बाल सम्प्रेक्षण गृह में पहले भी कई बार अपचारी बालकों के भागने की घटनाएं हो चुकी हैं। 2019 में आठ अपचारी बालकों द्वारा भागने की घटना के बाद तत्कालीन कलेक्टर लोकेश जाटव ने मजिस्ट्रेट जांच करवाई थी। इसके साथ ही पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बजट भी पास हुआ था। बहरहाल, अभी बाल सम्प्रेक्षण गृह में 30 तथा विशेष गृह बालक में 50 अपचारी बालक हैं जो विभिन्न जुर्मों में सजायाफ्ता हैं। नाबालिग अपराधियों के मामले में 2012 के निर्भया कांड के बाद बना कानून है। उसके परिपालन के तहत गंभीर अपराधों में लिप्त बाल अपचारियों को बड़े अपराधियों के साथ एक भवन (‌विशेष गृह) में रखा गया है। ऐसे में सुधरने के बजाय गलत राह पर जा रहे हैं। इसके चलते यहां का स्टाफ हर पल इनके खौफ में रहता है।

पुराने नियमों के तहत पहले अपचारी बालकों (18 साल से कम उम्र के) को परिसर स्थित ‘बाल सम्प्रेषण गृह’ में रखा जाता था लेकिन नए नियमों के बाद यहां की परिस्थितियों में भी नया मोड़ आया। दरअसल निर्भया कांड में एक आरोपी नाबालिग था। उसकी उम्र और सजा को लेकर कानूनविदों में लंबी बहस छिड़ी। इस बीच 2015 में इसे लेकर नया कानून बना। इसके तहत अपचारी ऐसे बालक जो 16 से 18 वर्ष के बीच के हैं और जिन्होंने गंभीर या जघन्य अपराध किए हैं उन्हें विशेष गृह (बालक) में रखे जाने का प्रावधान किया गया। इस विशेष गृह में इसके पहले से ही 18 से 21 वर्ष के उम्र के अपराधियों को रखा जाता है। यानी अब दोनों तरह के अपराधी इसमें हैं। मप्र में विशेष गृह (बालक) केवल इंदौर व सिवनी में ही हैं। इंदौर के विशेष गृह में 35 अपराधी हैं लेकिन यहां सुरक्षा के भी पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। यही कारण हैं हर साल दो-तीन बार बाल अपचारियों के भागने की घटनाएं हुई हैं। एक बार तो रात को बाल अपचारी गार्ड पर हमला कर भाग गए थे।

काउंसिंग भी कारगर नहीं
बाल अपचारियों को सुधारने के लिए शासन की ओर से काउंसलर भेजे जाते हैं। इसके अलावा टीवी व पुस्तकों के जरिए ज्ञानवर्धक जानकारी दी जाती है। इसके अलावा विनम्रता से व्यवहार करने का प्रावधान है। इसके बावजूद वे इसे आत्मसात नहीं कर पाते। दरअसल, यहां के बाल अपचारी हत्या, दुष्कर्म, गैंगरेप आदि में आरोपित हैं। इनमें ग्वालिययर, भिंड, धार, खण्डवा, उज्जैन आदि के अपचारी हैं।

ऐेसे खूंखार अपराधी है यहां
इंदौर के एक बाल अपचारी ने छह साल पहले एक अपने साथियों के साथ एक युवक का सिर सहित हाथपैर काटकर पंढरीनाथ क्षेत्र के नाले में ठिकाने लगा दिए थे। इस मामले में वह यहां बंद है। वह तीन माह पहले यहां अपने चार साथियों के साथ यहां से भाग चुका है। बाद में उसके सहित दो साथी पकड़ा गए थे जो फिर से यहीं हैं। यहां परिसर में विशेष गृह बालिका भी है यहां अपचारी लड़कियों को रखा जाता है। इसमें वह अपचारी बालिका भी है जिसने पिछले साल रुक्मणि नगर में रहने अपने पिता एएसएफ के कांस्टेबल ज्योतिप्रसाद शर्मा और मां नीलम की प्रेमी धनंजय उर्फ डीजे से हत्या करवा दी थी।

न परिवार और न ही पुलिस का डर
खूंखार अपराधियों के कारण यहां का स्टाफ काफी खौफजदा है। उनका कहना है कि बाल अपचारियों के हौंसले इसलिए भी बुलंद हो गए हैं क्योंकि वे बड़े अपराधियों के साथ तो हैं ही, उन्हें कानूनन पता है कि न तो उनके साथ पुलिस सख्ती कर सकती है और न ही विशेष गृह का स्टाफ। ऐसे में वे खौफ पैदा करते हैं। तीन साल पहले विधायक उषा ठाकुर ने समिति की सदस्य होने के नाते यहां के दौरा किया तो उन्होंने भी पाया था कि स्टाफ खौफजदा है।

सुरक्षा की कमजोर कड़ियां
1. विशेष गृह का भवन काफी जर्जर है। वहां की दीवारें तो कमजोर हैं ही खिड़कियों की ग्रिल को भी आसानी से निकाला जा सकता है। दो साल पहले बाल अपचारी उक्त भवन के पिछले हिस्से के रोशनदान की ग्रिल निकालकर भागे हैं।
2. भवन के बाहर पिछले साल सुरक्षा के लिए 18 लाख रु. की लागत से दीवार बनाने का काम शुरू हुआ लेकिन बजट के अभाव में अधूरा ही रह गया।
3. यहां अभी भी सीसीटीवी कैमरे पर्याप्त संख्या में नहीं हैं। पिछले हिस्से से जहां बाल अपचारी भागे थे वहां कैमरे ही नहीं लगे हैं।
4. पहले यहां 24 घंटे के लिए आठ सुरक्षा गार्ड की ड्यूटी रहती थी। हर छह घंटे के लिए दो-दो सुरक्षा गार्ड रहते थे। अब उनमें से आधे कम कर दिए हैं। इस तरह एक समय में एक ही गार्ड रहता है।

नाबालिगों से जुड़ी हकीकत
-जिले में पिछले पांच सालों में चोरी व लूट की वारदातों में नाबालिगों की संख्या बढ़ी है।
-इसके अलावा दुष्कर्म व हत्या के मामलों में भी लिप्त हैं।
-चर्चित बेटमा के दोहरे गैंग रेप में दो आरोपी नाबालिग थे।
-तीन सालों में विभिन्न मामलों में पुलिस ने 900 से ज्यादा नाबालिगों को विभिन्न मामलो में गिरफ्तार किया है।

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