12 दिन रोम में फंसे रहने के बाद भारत लौटे 262 यात्री, घर आने के लिए अभी 14 दिन और इंतजार

नगर संवाददाता | इंदौर

सभी यात्रियों को सतर्कता के तौर पर दिल्ली में क्वारंटाइन कैंप में 14 दिन के लिए भेजा,
इंदौर की छात्रा भी शामिल

12 दिन तक इटली की राजधानी रोम में फंसे रहने के बाद 262 भारतीय यात्री रविवार सुुबह दिल्ली पहुंचे। हालांकि अभी भी इन्हें अपने घर जाने के लिए 14 दिन दिल्ली में ही इंतजार करना होगा। इन यात्रियों को दिल्ली में ही क्वारंटाइन कैंप में रखा गया है। इनमें इंदौर की भी एक छात्रा शामिल है।

दुनिया में बढ़ते कोरोना के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने 10 मार्च से भारत आने वाले सभी यात्रियों के लिए कोरोना ना होने का मेडिकल सर्टिफिकेट अनिवार्य किया था। इसके तहत इटली में भी लगातार बढ़ रहे कोरोना को देखते हुए वहां रह रहे भारतीय वहां से भारत आ रहे थे। इसी बीच 11 मार्च को एयर इंडिया की फ्लाइट से दिल्ली आने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे यात्रियों को इसी नियम के तहत रोक दिया गया था। इनमें इंदौर के मनोरमागंज में रहने वाले फार्मा व्यवसायी की बेटी भी शामिल थी जो वहां ज्वेलरी डिजाइनिंग में मास्टर डिग्री लेने के लिए गई थी।

कोरोना के कारण कॉलेज बंद, रोम में परीक्षा भी नहीं दे सकी छात्रा

छात्रा ने बताया कि उसकी अभी एक्जाम चल रही है, कोरोना के कारण कॉलेज बंद होने से कॉलेज द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई और एक्जाम ली जा रही है, लेकिन दिल्ली में ठीक से इंटरनेट न चल पाने के कारण वह एक्जाम भी नहीं दे पा रही है। परिवार का कहना है कि अच्छी बात यह है कि वह सुरक्षित भारत लौट आई और जल्द घर भी लौट आएगी। छात्रा ने बताया कि रोम में हालात बहुत खराब हैं। पूरी इटली कई दिन से बंद है। सिर्फ दवा और खाने-पीने की चीजों की दुकानें खुली हैं। कोरोना के डर से इटली से भारत आ रहे जिन यात्रियों को कोरोना नहीं था, उन 262 यात्रियों को एयर इंडिया का विशेष विमान रोम से लेकर रविवार सुबह साढ़े आठ बजे दिल्ली पहुंचा। इंदौर की छात्रा ने बताया कि विदेशों से आ रहे सभी लोगों को दिल्ली के आईटीबीपी में बनाए गए क्वारंटाइन कैंप में 14 दिन के लिए रखा जा रहा है, इसके तहत उन्हें भी वहां लाया गया। यहां उनकी दोबारा कोरोना की जांच होगी और नेगेटिव पाए जाने पर उन्हें 14 दिन बाद घर भेजा जाएगा। छात्रा सहित अन्य यात्रियों द्वारा जब पीएम नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और सांसद शंकर लालवानी से इस पर मदद मांगी तो भारत से डॉक्टरों की टीम ने रोम जाकर यात्रियों का सैंपल लिया।

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