49 दिन में कराची में दफनाए गए 3265 शव, आंकडों में हेरा-फेरी

इस्लामाबाद

महामारी संकट कराची नगर निगम ने जारी किया आकड़ा

कोरोना वायरस के संक्रमण से लगभग पूरी दुनिया प्रभावित है। जिससे भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान भी अछूता नहीं है। यहां डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के पास व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट, मास्क और दस्ताने की सुविधा नहीं है। इसके बावजूद कोविड-19 के मामले जनसंख्या के हिसाब से काफी कम हैं।

पाकिस्तान में अब तक कोरोना के 7400 से ज्यादा मामले सामने आए हैं और 143 लोगों की मौत हुई है। मगर पाकिस्तान के इन आंकड़ों पर उस समय सवाल उठने लगे जब खबर आई कि कराची शहर के कब्रिस्तानों में बीते 49 दिनों में 3265 शवों को दफनाया गया है। ये संख्या चौंकाने वाली है।

एक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार ये आंकड़े कराची प्रशासन ने जारी किए हैं। इससे पहले पाकिस्तानी मीडिया में इस तरह की खबरें आई थीं कि कराची के अस्पतालों में कोरोना से बड़ी तादाद में लोगों की मौत हो रही है लेकिन आम लोगों से प्रशासन इसे छुपाने की कोशिशों में लगा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार जब हजारों दफनाए गए शवों को लेकर अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने इस बात का जवाब नहीं दिया कि आखिर इतने लोगों की मौत कैसे हुई।

वहीं इमरान खान सरकार ने मौत के इन आंकड़ों को सिरे से खारिज कर दिया है। जबकि शवों को दफनाने का आंकड़ा कराची नगर निगम ने जारी किया है। इससे साफ जाहिर होता है कि इमरान सरकार कुछ छुपाने की कोशिश कर रही है। पाकिस्तान में कोरोनावायरस मामलों में नियमित रूप से वृद्धि हो रही है। देश में कोरोनावयरस से शनिवार शाम तक 7,654 लोग संक्रमित हुए हैं, जबकि 144 लोगों की मौत हो गई है।

जमात से जुड़ रहे हैं महामारी के तार तबलीगी के 429 सदस्य सिंध प्रांत में कोरोना पॉजिटिव

इंडोनेशिया, मलेशिया और भारत के बाद पाकिस्तान में भी कोरोना वायरस फैलने के लिए तबलीगी जमात को काफी हद तक जिम्मेदार माना जा रहा है। शुक्रवार को तबलीगी के 429 सदस्य सिंध प्रांत में कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके अलावा पंजाब में भी 1100 से ज्यादा तबलीगी से जुड़े लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। तबलीगी जमात ने मार्च में सरकार के मना करने के बावजूद इज्तमा का आयोजन किया था और ईरान के आलावा पाकिस्तान में कोरोना संक्रमण का प्रमुख हॉटस्पॉट पंजाब के रायविंड शहर में तबलीगी का मदरसा ही है। वहीं पीर नूरुल हक कादरी ने भी कोरोना को हराने के लिए सरकार के निर्देशों को मानने के लिए कहा है।

कराची मेट्रोपॉलिटिन कॉर्पोरेशन ने जारी किया है डेटा

3265 शवों को दफनाए जाने का ये डेटा कराची मेट्रोपॉलिटिन कॉर्पोरेशन (केएमसी) ने ही जारी किया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक डिस्ट्रिक सेन्ट्रल में 181, यासिनाबाद में 76, साखी हसन में 273, अल नूर में 30, मोहम्मद शाह कब्रिस्तान में 681, घसदर बाबा कब्रिस्तान में 430 शवों को दफनाया गया है। इस डेटा के मुताबिक कराची के सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी में साल के शुरूआती तीन महीनों में 10,791 लोग लाए गए थे जिनमें से 121 की मौके पर ही मौत हो गई थी। इन कब्रिस्तानों में दफनाई गई लाशों का सीधा संबंध कराची के सरकारी अस्पतालों से है लेकिन इनमें से कितने लोगों को कोरोना था इसका पता अभी नहीं लग पाया है।

कट्‌टरपंथी मौलवियों के आगे बेबस है इमरान सरकार

मुनीबुर रहमान और मुफ्ती तकी उस्मानी के नेतृत्व वाले कट्‌टरपंथी मौलवियों के एक समूह ने कहा है कि ये मौलवी ही तय करेंगें कि मस्जिदें खुलेंगी की नहीं, सरकार इसमें कोई हस्ताक्षेप न करे। बीते शुक्रवार को जुमा की नमाज के चलते मौलवियों ने सरकार के दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ा दीं। इससे पहले वाले शुक्रवार को नमाजियों और पुलिस में हाथापाई भी हो गई थी। वहीं, मौलाना अब्दुल अजिज ने सरकार के साथ सहयोग करने से मना कर दिया है। वह धार्मिक मामलों के मंत्रालय के स्वामित्व वाली मस्जिद के मौलवी हैं। इसके बावजूद सरकार उनको पद से नहीं हटा पा रही है। पाक के हालत बिगड़ते जा रहे हैं।

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