इंदौर में फंसे थे 33 पािकस्तानी नागरिक और देश में 193, सभी पहुंचे अपने वतन

विकाससिंह राठौर | इंदौर

पाकिस्तान ने की थी मांग भारत में फंसे 193 पाकिस्तानियों को उनके देश पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने खोली वाघा बॉर्डर, रेल और हवाई सेवा बंद होने से बॉर्डर तक सड़क मार्ग से पहुंचाया

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देश में 25 मार्च से लॉकडाउन किया गया था। इसके कारण कई देशों के नागरिक यहीं फंस गए। इनमें सैकड़ों पाकिस्तानी नागरिक भी हैं। पाकिस्तान द्वारा मांग किए जाने पर 193 पाकिस्तानी नागरिकों को मंगलवार को वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान पहुंचाया गया। इसके लिए भारत सरकार ने लॉकडाउन के दौरान बंद बॉर्डर को खोला। इनमें से 33 पाकिस्तानी नागरिक पिछले डेढ़ से दो माह से इंदौर में फंसे थे, जो अलग-अलग कारों से सुबह अटारी-वाघा बॉर्डर पहुंचे।

भारत में फंसे पाकिस्तानी नागरिकों द्वारा लगातार पाकिस्तानी एम्बेसी से संपर्क करते हुए वतन वापसी की मांग की जा रही थी। इसके बाद पाकिस्तान ने यहां फंसे पाकिस्तानी नागरिकों को पहुंचाने की मांग की थी। इस पर भारत सरकार ने लोगों की परेशानी को देखते हुए सहमति दी थी।

1 मई को विदेश मंत्रालय द्वारा पाकिस्तानी एम्बेसी से मिली 193 नागरिकों की सूची देश के सभी राज्यों के पुलिस डीजी को भेजी गई थी। मध्यप्रदेश में भी इसी तरह की सूची भेजी गई थी, जिसमें प्रदेश से कुल 39 लोगों के नाम शामिल थे। इनमें सर्वाधिक 33 पाकिस्तानी नागरिक इंदौर में थे, जो डेढ़ से दो माह से यहां फंसे थे। वाघा बॉर्डर से इन लोगों को घरों तक पहुंचाने के लिए पाकिस्तानी सरकार ने वाहनों की व्यवस्था की थी।

सबसे ज्यादा महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में फंसे थे पाकिस्तानी नागरिक

किस्तान पहुंचे 193 यात्री देश के कुल 10 राज्यों में थे। इनमें सर्वाधिक 72 महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में थे। इसके बाद सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश में 39 थे, जिसमें 33 इंदौर, पांच भोपाल और एक बुरहानपुर से था।

5 मई सुबह 10 बजे तक वाघा बॉर्डर पर पहुंचने के थे आदेश, दो दिन पहले इंदौर से हुए रवाना

इंदौर के गांधी नगर बोहरा कॉलोनी में रहने वाले हकीमुद्दीन लश्करी ने बताया कि उनके भानजे काइद जौहर जो मूलत: पाकिस्तान के कराची से हैं, अपने नौ सदस्यीय परिवार के साथ भारत की प्रमुख दरगाहों पर चादर चढ़ाने के लिए 20 मार्च के करीब भारत आए थे। लॉकडाउन के समय ये बुरहानपुर से गलियाकोट राजस्थान जा रहे थे, तभी लॉकडाउन होने से इंदौर आ गए और यहीं फंस गए थे। उन्होंने पहले चरण का लॉकडाउन खत्म होने के बाद के लिए इंदौर से अमृतसर की ट्रेन में टिकटें भी बुक करवाई थीं, लेकिन लॉकडाउन आगे बढ़ जाने पर दिल्ली स्थित पाकिस्तानी एम्बेसी से संपर्क कर मदद मांगी। इसके बाद इंडियन एम्बेसी ने उनसे कहा गाड़ी का इंतजाम करें, इस पर एक ट्रेवल्स से कार बुक की और उसकी जानकारी एम्बेसी को भेजी। 1 मई को उन्हें अनुमति मिल गई और ं विदेश मंत्रालय की ओर से परमिशन का लेटर भी भेजा गया, जिसमें लिखा था कि उन्हें 5 मई को सुबह 10 बजे तक वाघा बॉर्डर पर पहुंचना होगा। इसके बाद 3 मई यानी रविवार दोपहर को वे इंदौर से रवाना हुए और मंगलवार सुबह 10 बजे वाघा बॉर्डर पहुंचे।

पंजाब और राजस्थान में हुई जांच, रास्ते में नहीं मिला खाना

काइद जौहर सहित नौ सदस्यीय परिवार को लेकर वाघा बॉर्डर तक पहुंचे इंदौर के ट्रेवल संचालक जितेंद्र गिरी ने बताया कि उन्हें भी इंडियन एम्बेसी से 30 अप्रैल को फोन आया था और पूछा गया था कि क्या वे सभी सदस्यों को 5 मई सुबह 10 बजे तक वाघा पहुंचा सकते हैं। जितेंद्र द्वारा सहमति दिए जाने पर सूची में उनका नाम और गाड़ी का नंबर भी शामिल किया गया, जिससे रास्ते में चेकिंग के दौरान कोई परेशानी नहीं आई। राजस्थान और पंजाब में सभी यात्रियों के पासपोर्ट सहित अन्य दस्तावेजों की जांच की गई। साथ ही गाड़ी की भी जांच की गई। वाघा बॉर्डर पर पूरे देश से आए वाहनों की भीड़ थी, वहां भी वाहनों और यात्रियों की जांच की गई। रास्ते में कहीं भी खाने-पीने की चीजें नहीं मिली, इसलिए साथ ले गए खाने से ही काम चलाया। हामीद ने बताया कि काइद परिवार सहित बुधवार तक कराची में अपने घर तक पहुंचेंगे। काइद ने शहर में लॉकडाउन के दौरान व्यवस्थाओं और आम लोगों, प्रशासन व सरकार के सहयोग की काफी तारीफ भी की। जितेंद्र की ही तरह इंदौर से अनिल कुमार व उनके परिवार के चार अन्य सदस्यों को लेकर वाघा पहुंचे आनंद सोनी ने बताया कि उन्होंने यात्रियों को गोपाल बाग से रविवार को बैठाया था और मंगलवार सुबह वे सभी वाघा बॉर्डर पहुंच गए थे। इस दौरान रास्ते में कोई तकलीफ नहीं हुई, हालांकि चेकिंग बहुत थी। सभी यात्रियों ने शहर की व्यवस्थाओं का बहुत सराहा।

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