38 दिन हॉस्पिटल में, आठ रिपोर्ट पॉजिटिव, फिर भी डरे नहीं, स्वस्थ होकर ही लौटे

विनोद शर्मा | इंदौर

सामान्य रूप से 14 दिन में कोरोना पॉजिटिव घर लौट जाते हैं, पर सेवकराम की कहानी अलग है और हम सब के लिए प्रेरणादायक भी कि कोरोना हमारी हिम्मत के आगे बेहद छोटा है।

कोरोना से जिंदगी की जंग जीतने वाले जिन लोगों को सोमवार को इंदौर में डिस्चार्ज किया गया, उनमें 45 वर्षीय सेवक राम सोनवान्या भी शामिल हैं। इन्होंने 48 दिनों के लॉकडाउन में से 34 दिन अस्पतालों में बिता दिए। जब वह घर लौटे तो परिवार भावुक हो उठा। मोहल्ले के लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। सेवकराम ने भी सभी का अभिवादन स्वीकार किया और कोरोना से बचाव के तरीके भी बताए।

सात दिन से लगातार हो रही थी सैंपलिंग, रविवार को नेगेटिव आई रिपोर्ट

40/2 नयापुरा जेल रोड निवासी सेवकराम घर पर ही कपड़ों पर प्रेस करते हैं। अचानक तबियत खराब होने के कारण 8 अप्रैल को एमटीएच हॉस्पिटल में भर्ती किया था। रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 12 अप्रैल को उन्हें एमआरटीबी हॉस्पिटल भर्ती किया गया। वहां पहली बार पता चला कि उन्हें शुगर भी है। घबराहट बढ़ गई। अनचाहे ख्याल आने लगे। मगर, परिवार की चिंता के चलते हिम्मत नहीं हारी। इलाज जारी रहा। 8-10 दिन से सेवकराम को लग रहा था कि वह स्वस्थ्य हो चुके हैं। हालांकि शुगर के कारण डॉक्टर जल्दबाजी नहीं करना चाहते थे। सैंपलिंग की गई। रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हालांकि लक्षण खत्म हो चुके थे। सेवकराम की जिद के आगे डॉक्टर भी आठ दिन से लगातार सैंपलिंग करके पहुंचाते रहे। अंतत: 10 मई की रात को रिपोर्ट नेगेटिव आई। डॉक्टरों ने सेवकराम को इशारा कर दिया कि कल घर जाना है, तैयार हो जाओ। सोमवार दोपहर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया।

पूरा परिवार भी हुआ था क्वारेंटाइन

सेवकराम की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उनके परिवार के छह सदस्यों को भी क्वारेंटाइन किया गया था। इनमें उनकी मां कमलाबाई सोनवान्या को अरबिंदों अस्पताल कोविड सेंटर भेजा जबकि बाकी पांच सदस्यों को बिंजालिया रिसोर्ट भेजा था। सभी डिस्चार्ज हो चुके हैं।

admin