महू में 50 करोड़ का राशन घोटाला

विनोद शर्मा | इंदौर

राशन माफिया बेपर्दा लॉकडाउन में गरीबों के लिए आया सरकारी राशन खुद के गोदामों में जमा कर घटिया चावल दुकानों पर पहुंचाया

महू में पचास करोड़ का राशन घोटाला सामने आया है। जिला प्रशासन ने महू के जिस मोहनलाल अग्रवाल को बेनकाब किया है, वह घपले का मास्टरमाइंड है। राजनीतिक रसूख की आड़ में उसने बड़े घपले को अंजाम दिया। महू केंट बोर्ड में वह दो बार पार्षद भी रह चुका है। प्रशासन ने मोहनलाल सहित 8 लोगों पर केस दर्ज किया है। इन पर दो-दो हजार का इनाम भी घोषित किया गया है। इनकी संपत्ति भी कुर्क की जा सकती है। आरोपियों को रासुका में निरुद्ध भी किया जा सकता है।

कांग्रेस के उद्योग एवं व्यापारी प्रकोष्ठ का अध्यक्ष और महू शहर कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष मोहनलाल खाद्यान्न की हेराफेरी का पुराना खिलाड़ी है। मवेशियों को खिलाने लायक चावल राशन की दुकानों से जनता को बांटे जाने के मामले में शिवराज सरकार पहले से ही कांग्रेस के निशाने पर है, ऐसे में महू में भी करोड़ों का घपला उजागर होने से व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

हालांकि कलेक्टरों को सरकार द्वारा दिए गए जांच के आदेश का ही परिणाम है कि इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने महू में बारीकी से जांच करते हुए इसका भंडाफोड़ किया है। शनिवार को कलेक्टर ने 50 करोड़ का जो राशन घोटाला उजागर किया, उसे मोहनलाल अग्रवाल और उसकी टीम ने ही अंजाम दिया है।

कोरोनाकाल में मिला गरीबों के हक का अनाज बाजार में बेचते रहे जमाखोर

25 दिन की जांच के बाद कलेक्टर मनीष सिंह और उनकी टीम ने शनिवार को महू में 50 करोड़ से अधिक का राशन घोटाला उजागर किया है। मोहन अग्रवाल और उनके बेटे मोहित अग्रवाल ने घोटाले को अंजाम दिया। कोरोनाकाल में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत आए चावल पिता-पुत्र ने गरीबों को बांटने के बजाय पहले जमा किए और बाद में बाजार में बेचना शुरू कर दिए। इस घोटाले के तार बालाघाट, मंडला और नीमच से भी जुड़े पाए गए हैं।

मीडिया से रुबरू हुए कलेक्टर सिंह ने बताया कि जमाखोरी की शिकायतों के बाद से ही मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने राशन माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मैंने सभी एसडीएम को जांच के आदेश दिए। महू एसडीएम अभिलाष मिश्रा और उनकी टीम को 17 अगस्त को एक क्लू मिला। छानबीन के दौरान एक गोदाम में सरकारी राशन के करीब 750 कट्टे चावल के रखे हुए थे। मंडी प्रांगण में शासकीय वेअर हाउस से लगा यह गोदाम हर्षिल ट्रेडर्स के नाम है, जो नागरिक आपूर्ति निगम के परिवहनकर्ता मोहनलाल अग्रवाल के बेटे मोहित की फर्म है और उसी का गोदाम है। मामले में खुलासे की जल्दी दिखाने के बजाय हमने बारीकी से जांच की, जिसमें 25 दिन लगे। इस दौरान बिल मांगने पर इन्होंने फर्जी तरीके से हासिल बिल पेश कर दिए। छानबीन में पता चला कि मोहनलाल ने अपने सहयोगी व्यापारी आयुष अग्रवाल, लोकेश अग्रवाल और शासकीय उचित मूल्य की दुकान संचालकों के साथ मिलकर राशन की हेरा-फेरी को अंजाम दिया है।

एफआईआर दर्ज…

गरीबों के हक के राशन की हेराफेरी मामले में परिवहनकर्ता मोहनलाल अग्रवाल के अलावा बेटे मोहित और तरुण, सहयोगी आयुष अग्रवाल, लोकेश अग्रवाल सहित 4 राशन दुकान संचालक और सोसायटी के प्रबंधक पर किशनगंज और बड़गोंदा थाने में केस दर्ज करवाया गया है। संबंधित विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका की जानकारी भी निकाली जा रही है।

शिकायतों से घोटाले तक…

महू एसडीएम को गरीबों के लिए आवंटित राशन के बंटवारे को लेकर कई शिकायतें मिली थीं। उन्होंने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया और जांच की। जांच में राशन घोटाला उजागर हुआ।

सरकारी दुकानों से खरीदते चावल…

मोहनलाल उचित मूल्य की दुकानों को उनके हिस्से का पूरा राशन भेजकर बिल पर साइन करा लेता और बाद में बेटा दुकान से 8-10 क्विंटल अनाज खरीद लेता। दुकानदार गरीबों को कम अनाज देकर या खत्म होना बता देते। वेअर हाउस से राशन पैक कट्टे निकलकर दुकानों पर खुले पहुंचते।

राशन दुकानों पर छापे

मामला पकड़े जाने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने शहर की सात राशन दुकानों पर छापा मारा तो चार दुकानों पर जबरिया मसाले व किराना सामान थमाने का मामला सामने आया। मसालों की पैकिंग अमानक मिली। कहीं बैच नंबर नहीं तो कहीं मैन्युफैक्चरिंग डेट। छापे बाणगंगा और विजय नगर क्षेत्र में पड़े।

…ऐसे तैयार होते थे कूटरचित दस्तावेज

राशन दुकानों से मिले राशन का सहयोगियों की मदद से फर्जी बिल तैयार कराया जाता। इसके बाद मंडी से फर्जी अनुज्ञा तैयार कर या खराब माल को शासन से मिले अच्छे माल से बदलकर खुले बाजार में बेचा जाता। सिर्फ चावल ही नहीं, गेहूं और केरोसिन में भी मोहनलाल ने यही खेल किया।

10 साल में 50 करोड़ के राशन की हेराफेरी

मोहनलाल 20 साल से खाद्यान्न और केरोसिन वितरण का काम देखता आ रहा है। अलग-अलग फर्मों के नाम से परिवहनकर्ता की अनुज्ञा प्राप्त कर उचित मूल्य की दुकानों को मिलने वाले राशन के लिए परिवहन करता रहा है। ऑनलाइन वितरण व्यवस्था के बाद भी हेराफेरी जारी रही। शुरुआती अनुमान के हिसाब से सिर्फ महू में ही 10 साल में 50 करोड़ के राशन की हेराफेरी की गई।

दूसरे जिलों तक फैले तार…

मोहनलाल के सहयोगी आयुष अग्रवाल की फर्म आयुष फूड और लोकेश अग्रवाल की फर्म लोकेश कुमार शारदानंद के बिल जांचकर्ताओं के हाथ लगे हैं। इनकी जांच में पता चला कि इसी चावल का सौदा नीमच और मंडला में भी किया गया है। नीमच थाने में जिस व्यापारी पर राशन की हेराफेरी का केस दर्ज है, वह इनसे ताल्लुक रखता है।

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