कोरोना से 52 मौतें, इनमें से 31 को थी दूसरी गंभीर बीमारियां

विनोद शर्मा /संतोष शितोले | इंदौर

खतरनाक कोरोना वायरस की चपेट में करीब 900 संक्रमित पॉजिटिव पाए गए जिनमें से 52 लोगों की मौत हो चुकी है व तीन गंभीर है। अब तक जो 52 मौतें हुई हैं उनमें 31 मरीज तो ऐसे थे जिनकी पुरानी डिसीज हिस्ट्री थी। इस तरह वे कोरोना के अटैक से अस्पताल के आईसीयू व वेंटिलेटर तक पहुंचे और उनकी मौत हो गई। दूसरे 21 ऐसे हैं जिन्हें पूर्व में कोई बीमारी नहीं थी लेकिन वायरस ने उन्हें ऐसा घेरा कि उनकी जान चली गई। ऐसे में पूर्व की बिमारियों से ग्रसित मरीजों व खासकर बुजुर्गों को और भी ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

स्टडी | एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने कोरोना से हुई मौतों की स्टडी की, टीआई देवेंद्रसिंह भले ठीक हुए लेकिन उनकी मौत भी कोरोना से ही मानी

रिजल्ट | अधिकांश को डायबिटीज, हाइपरटेंशन, ब्लड प्रेशर, निमोनिया से पीड़ित, लेकिन मरे रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से कोरोना ने बनाया आसान शिकार

कोरोना से शहर में पहली मौत अब्दुल हमीद (65) निवासी सिलावटपुरा की 25 मार्च को हुई थी। उन्हें डायबिटीज व निमोनिया था। अस्पताल में भर्ती होने के दो दिन बाद ही उनकी मौत हो गई थी। 30 मार्च को मो. साजिद (41) निवासी राजकुमार कॉलोनी की मौत हुई थी। वे भी डायबिटीज व निमोनिया से ग्रसित थे। इसके बाद जरीन बी पति अकरम खान (49) निवासी धार रोड की भी 30 मार्च को मौत हुई जो इन दोनों बिमारियों के अलावा हाइपरटेंशन की मरीज थी। इसी तरह 2 अप्रैल को जैतून बी पति हाजी (65) निवासी दाउदी नगर की मौत हुई। वह भी इन तीनों बिमारियों से ग्रसित थी। 4 मार्च को जावेद (42) निवासी नार्थ हाथीपाला की भी इसी तरह मौत हुई। 5 अप्रैल को नसरीन बी (53) निवासी की मौत हुई जो डायबिटीज के साथ एक्यूट रिनेलफैल्युअर थी। इसी दिन रफीक (50) निवासी की मौत हुई जो हाईपरटेंशन के साथ इलेक्ट्रॉलाइट इमबैलेंस से ग्रसित था। इसके एक दिन पूर्व मो. असलम (54) खजराना की मौत हुई थी जो हाइपरटेंशन के साथ अस्थमा का मरीज था।

खत्म नहीं हो रहा क्रम

14 अप्रैल को सलीम पिता जुम्माजी (60) की 17 दिन जिंदगी और मौत से जूझते मौत हो गई। इसमें कारण डायबिटीज भी रहा। 15 अप्रैल को मोहनलाल (56) निवासी विश्वनाथधाम, खजराना की मौत हुई जो डीएम-2, डीवीटी नामक बिमारियों से ग्रस्त थे। भाजपा पार्षद देवकृष्ण सांखला निमोनिया ग्रस्त थे जिनकी मौत के बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी।

हाइपरेंशन, निमोनिया व डायबिटीज वाले ज्यादा

अब्दुल वाहिद (56) निवासी ग्रीन पार्क कॉलोनी की 1 अप्रैल को मौत हुई। वह हाइपरटेंशन, डायबिटीज सहित दो अन्य बिमारियों से ग्रसित था। 6 अप्रैल को अजहर खान (50) निवासी उषा फाटक, जेल रोड की मौत और 4 अप्रैल को मदीना शेख (60) निवासी अनूप नगर की मौत हुई थी। ये दोनों डायबिटीज (सेकण्ड स्टेप) से ग्रस्त थे। 30 वर्षीय स्नेह धवन (30) निवासी नेहरू नगर युवा वर्ग का था लेकिन क्रोनिक एल्कोहोलिक (ज्यादा शराब का सेवन करता) था। 7 अप्रैल को देवेंद्र जैन निवासी ओम विहार नगर (47), 5 अप्रैल को हरीश हरियान (51) निवासी पैलेस कॉलोनी तथा 6 अप्रैल को संजय परिहार (47) की मौतें हुई। तीनों ही हाई ब्लड प्रेशर के मरीज थे।

अनदेखी करने वाले डॉक्टर भी नहीं बचे

9 अप्रैल को डॉ. शत्रुघ्न पंजाबी (62) निवासी रूपराम नगर व 8 अप्रैल को कृष्णचंद्र (52) निवासी सत्यदेव नगर की मौत हुई। ये दोनों भी अलग-अलग बिमारियों से ग्रसित थे लेकिन खास कारण कोरोना रहा। 10 अप्रैल को ओमप्रकाश (61) निवासी ब्रह्मबाग की मौत हो गई। वे डीएम, पोस्ट पीटीसीए व सीएडी नामक बीमारियों व विकार से ग्रस्त थे। 10 अप्रैल को बयुद्दीन (66) निवासी लोहापुरा की मौत हो गई जो डीएम व सीओपीडी मरीज थे। बाबूलाल पिता बलराम (75) निवास सोमनाथ की चाल की 2 अप्रैल को मौत हो गई। वे हाई ब्लड प्रेशर मरीज थे। 4 अप्रैल को अब्दुल रहीम खान (70) की मौत हुई वे डीएम मरीज थे। 13 अप्रैल को बद्रुनिशा पति मो. इब्राहिम (60) निवासी दौलतगंज की मौत हो गई। वह सीएबीजी से ग्रस्त थी।

52 में से 11 मरीजों की रिपोर्ट तो उनकी मौत के बाद आई

लिस्ट में पांच मरीजों की पूर्व बिमारियों में निल (कुछ नहीं) का स्पष्ट जिक्र है 13 मरीजों के मामले में किसी बीमारी का जिक्र नहीं है। हालांकि 52 लोग जिनकी मौतें हो चुकी हैं सभी पॉजिटिव हैं। इनमें 11 ऐसे हैं जिनकी मौत के बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आई है जबकि 7 ऐसे हैं जिनकी जिस दिन मौत हुई उनकी रिपोर्ट भी उसी दिन आई।

16 दिन में दो भाइयों की मौत से सदमे में गांधीनगर

4 अप्रैल को छोटे भाई की एमवायएच में मौत होने के 16 दिन बाद बड़े भाई ने सोमवार की सुबह अरबिंदो अस्पताल में दम तोड़ दिया। 16 दिनों में एक ही परिवार के दो मुखियाओं की मौत से पूरा गांधीनगर दहशतजदा है। हालांकि पॉलिपेक पार्थिव देह देकर नगर निगम के अफसरों की निगरानी में अंतिम संस्कार कराने वाले अफसर दोनों मौतें सामान्य बता रहे हैं। मगर, क्षेत्रवासी सरकार की सफाई को शक की नजर से देख रहे हैं।

1 अप्रैल को गांधीनगर 38 वर्षीय एक व्यक्ति में कोरोना की पुष्टि हुई। क्षेत्रीय विधायक के नेतृत्व में बन रहे भोजन का गरीबों में वितरण करते आए ईश्वरचंद वर्मा (47) को इसी दिन सर्दी-खांसी हुई। कोरोना संदिग्ध के तौर पर उन्हें एमआरटीबी में भर्ती कराया गया। 3 अप्रैल को उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। परिवार इससे खुश था लेकिन 4 अप्रैल को वर्मा की मौत सदमा दे गई। वर्मा का शव परिवार को दे दी। 20-25 रिश्तेदारों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार हुआ।

इसके आठ दिन बाद ईश्वरचंद के बड़े भाई व पहले से हार्ट पेशेंट विजय वर्मा (54) को सर्दी-जुकाम हुआ। उन्हें अरबिंदो में क्वारेंटाइन किया गया। वहीं उनका इलाज चला और सेंपलिंग हुई। रिपोर्ट नेगेटिव आई। बताया जा रहा है कि सोमवार को वर्मा की छुट्टी होना थी। इससे पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। अस्पताल की एम्बुलेंस पार्थिव देह लेकर सीधे गांधीनगर के श्मशान पहुंची। वहां नगर निगम के अफसरों की मौजूदगी में परिवार ने दाह संस्कार किया।

परिवार का आरोप- पॉजिटिव होकर भी निगेटिव रिपोर्ट दी

वर्मा परिवार का आरोप है कि ईश्वर की मौत पहले हुई। रिपोर्ट बाद में आई। शव ऐसे ही दे दिया गया। दो दर्जन लोग शवयात्रा में शामिल हुए। ईश्वर की सेवा में लगे होने के कारण विजय भी संक्रमित हो गए। यदि दोनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है तो ऐसा क्या हुआ जो 15 दिन के अंदर ही बिना किसी बड़ी बीमारी के दोनों की मौत हो गई। प्रशासन अपनी साख बनाए रखने के लिए पॉजिटिव के साथ ही मरने वालों के आंकड़ों से खिलवाड़ कर रहा है।

ईश्वर को लोगों ने भर्ती कराया था

ईश्वर को मार्च के अंतिम सप्ताह में टाइफाइड हुआ था। जो धीरे-धीरे रिवकर हो गया था। इसी बीच क्षेत्रीय विधायक के नेतृत्व में भोजन व राशन सामग्री वितरित होने लगी तो वह वितरण में लग गए। वहां जब उन्हें लोगों ने छींकते-खांसते देखा तो कहा कि डॉक्टर को दिखाकर जांच करा लो। इस पर ईश्वरचंद एमवाय पहुंचे। संक्रमण के लक्षणों के चलते उन्हें संदिग्ध मानकर भर्ती किया गया।

शव यात्रा में शामिल होने वालों को ढूंढ़ रहे हैं – दो भाइयों की मौत के बाद ईश्वर चंद के अंतिम संस्कार में शामिल हुए लोगों की तलाश तेज हो चुकी है। इन लोगों से सेल्फ क्वारेंटाइन होने की अपील की जा रही है।

परिवार को क्वारेंटाइन करवाए सरकार- क्षेत्रवासियों के अनुसार दोनों भाइयों का परिवार एक ही मकान में रहता है। दोनों मुखियाओं की मौत के बाद प्रशासन को चाहिए कि परिवार के अन्य सदस्यों की सेंपलिंग अच्छे से करवाए। उन्हें रिपोर्ट न आने तक क्वारेंटाइन किया जाए।


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