इंदौर में 70% संक्रमित बच्चे बिना दवाइयों के ही स्वस्थ

विकाससिंह राठौर | इंदौर

अच्छी खबर… अस्पताल में भर्ती जिन बच्चों में कोई लक्षण नहीं, उन्हें डॉक्टर नहीं दे रहे कोई दवाई

देश में कोरोना का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन इस बीच इंदौर में एक अच्छी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। शहर में कोरोना वायरस से संक्रमित हुए बच्चे बिना दवाइयों के ही ठीक हो रहे हैं। कुल संक्रमित बच्चों में से बिना दवाइयों के ठीक होने वाले बच्चे 70 प्रतिशत हैं। ये बच्चे संक्रमित होने के बाद 10 से 14 दिनों तक हॉस्पिटल में तो भर्ती रहे, लेकिन इस दौरान उन्हें कोई भी दवाई नहीं दी गई और वे अपने आप स्वस्थ होकर घर लौट गए। यह खुलासा शहर के 75 प्रतिशत से ज्यादा कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे अरबिंदो अस्पताल के एक्सपर्ट डॉक्टर्स ने किया है।

अरबिंदो के श्वसन रोग विभाग के एचओडी व वरिष्ठ श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि डोसी अपनी टीम के साथ यहां आने वाले सभी कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे हैं और अब तक यहां से 2500 से ज्यादा कोरोना मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। डॉ. डोसी ने बताया कि अरबिंदो से अब तक 100 से ज्यादा बच्चे उपचार के बाद ठीक होकर घर जा चुके हैं, अभी भर्ती करीब 400 मरीजों में 35 बच्चे ही हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं कि बच्चे कोरोना पॉजिटिव पाए गए, जिसके बाद उन्हें भर्ती किया गया, लेकिन उनमें कोरोना से जुड़ा कोई लक्षण जैसे बुखार, सर्दी-खांसी, सांस लेने में परेशानी नहीं थे। यानी बच्चों में वायरस था, लेकिन उसका कोई असर नहीं था। किसी तरह की कोई परेशानी ना होने पर हम बाल रोग विशेषज्ञों से चर्चा कर ऐसे बच्चों को कोई दवाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे बच्चों में सिर्फ हाइड्रेशन लेवल मेंटेन करने पर ध्यान दिया जा रहा है, यानी शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनी रहे। बच्चों पर पूरे समय ऑब्जर्वेशन रखा जाता है। 10 से 14 दिनों तक कोई परेशानी सामने ना आने पर उनका टेस्ट किया जाता है, जिसमें बच्चे नेगेटिव आते हैं और उन्हें डिस्चार्ज कर घर भेज दिया जाता है।

बच्चों में एडेप्टिव इम्युनिटी बड़ों से ज्यादा

डॉ. डोसी ने बताया कि बच्चों में एडेप्टिव इम्युनिटी बड़ों की अपेक्षा ज्यादा होती है। यानी बच्चों के शरीर में मौजूद रोग प्रतिरोधक तंत्र ज्यादा बेहतर तरीके से रोगों से लड़ने में सक्षम होता है। यही सिस्टम बिना किसी दवाई के शरीर में पहुंचे वायरस को मारने में सफल हो रहा है।

आगे भी ऐसे बच्चों को कोई खतरा नहीं

डॉ. डोसी ने बताया कि ऐसे बच्चे जो बिना किसी लक्षण के सिर्फ कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर भर्ती किए गए, उनमें से 70 प्रतिशत बच्चे बिना कोई दवाई खाए स्वस्थ हो गए और ठीक होकर अपने घर चल गए। जो बच्चे और बड़े इस वायरस की चपेट में आने के बाद स्वस्थ हो चुके हैं, उनके शरीर पर भविष्य में अगर ये वायरस दोबारा अटैक करता है तो आम लोगों की अपेक्षा ऐसे बच्चे व बड़े ज्यादा सुरक्षित होंगे क्योंकि इन बच्चों और बड़ों के शरीर का रोग प्रतिरोधक तंत्र इस वायरस से लड़ना सीख चुका है।

अस्पताल में खेलते रहते थे बच्चे : अभिभावक

मालगंज में रहने वाले संजय हातुनिया बताते हैं कि उनकी 12 साल की भतीजी बुखार होने पर जांच में पॉजिटिव आई थी। इसके बाद परिवार के सभी लोगों की जांच की गई। जिसमें संजय की 12 साल की बेटी और 10 साल के बेटे की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। लेकिन दोनों में ही कोई लक्षण नहीं थे। 10 दिन हॉस्पिटल में भर्ती रखने के दौरान वे स्वस्थ थे और खेलते रहते थे। डॉक्टरों ने उन्हें कोई दवाई भी नहीं दी। रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद वे घर आ गए।

 

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