छह राज्यों में 765 वर्ग किमी जंगल खत्म

नई दिल्ली

इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट में हुआ खुलासा, पूर्वोत्तर भारत में तेजी से कम हो रहे जंगल

वर्ष 1987 से अब तक 16 बारजारी की जा चुकी है यह रिपोर्ट

पूरे देश में वनक्षेत्र में भले वृद्धि हुई है लेकिन पूर्वोत्तर भारत में इसमें तेजी से कमी आई है। केंद्र सरकार का कहना है कि यह खास चिंता की बात नहीं है लेकिन पर्यावरणविदों ने इसे खतरे की घंटी बताया है। इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर), 2019 में यह बात कही गई है।

इसमें कहा गया है कि देश में वनक्षेत्र में 3976 वर्ग किमी की वृद्धि हुई है। लेकिन पूर्वोत्तर के आठ में से असम व त्रिपुरा को छोड़ कर बाकी छह राज्यों में 765 वर्ग किमी वन क्षेत्र कम हो गया है। हर दो साल बाद सर्वेक्षण के जरिए देश के वन संसाधनों का आकलन किया जाता है। वर्ष 1987 से अब तक 16 बार यह रिपोर्ट जारी हुई है। इससे पहले की कई रिपोर्ट्स में भी इलाके में वनक्षेत्र के सिमटने का जिक्र किया गया था।

रिपोर्ट को अच्छा संकेत बताते हुए जावड़ेकर ने कहा कि भारत आज पेरिस समझौते के लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया में भारत ही अकेला ऐसा देश है जहां घने, मध्यम और कम घने जंगलों में एक साथ वृद्धि देखने को मिली है। बीते चार वर्षों के दौरान देश में वनक्षेत्र 13 हजार वर्गकिमी बढ़ा है मंत्री ने दावा किया कि सरकार के फैसले के कारण बांस के क्षेत्रफल में भी अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है। इसे और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि पेरिस समझौते के तहत भारत ने 250 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा था जिसे 25 फीसदी पूरा कर लिया गया है।

इस कारण कम हो रहे हैं वनक्षेत्र लगातार – पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती आबादी की वजह से होने वाले अतिक्रमण, वनक्षेत्र से सटी बस्तियों में रहने वाले आदिवासियों को जमीन का पट्टा मिलने, विकास परियजोनाओं के चलते पेड़ों की कटाई, प्राकृतिक आपदाओं और खासकर पर्वतीय इलाकों में झूम खेती ही इसकी प्रमुख वजह है। उक्त रिपोर्ट में कहा गया था कि अतिक्रमण, पशुओं के चरने और वन उत्पादों की तस्करी से भी वन क्षेत्र घट रहा है।

क्या हैं जरूरी उपाय

वन विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वोत्तर के वनक्षेत्र का पूरे देश के लिए खास महत्व है। इसकी वजह यह है कि देश के कुल वन क्षेत्र का एक-चौथाई हिस्सा इलाके के आठ छोटे राज्यों में ही है। पूर्वोत्तर के वनक्षेत्र में लगातार होने वाली कमी का असर देश के भौगोलिक इलाके के 33 फीसदी को वनक्षेत्र से ढकने का लक्ष्य प्रभावित होगा। पारिस्थिकीय असंतुलन और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए कम होने वाले वनक्षेत्र की भरपाई के लिए तत्काल नए सिरे से प्रयास जरूरी हैं।” कहीं-कहीं कुछ सौ पौधे लगाने से कोई फायदा नहीं होगा। अतिक्रमण और इंसानी गतिविधियों की वजह से घटते जंगल को पहले की हालत में ले जाने के लिए ठोस और संगठित कदम उठाया जाना चाहिए।

पूर्वोत्तर में घटता वनक्षेत्र

उक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्वोत्तर में 765 वर्ग किमी के जंगल घटे हैं। असम और त्रिपुरा के अलावा यहां के सभी राज्यों में वनक्षेत्र कम हुआ है। हालांकि पर्यावरण मंत्री जावड़ेकर कहते हैं, पूर्वोत्तर में वन क्षेत्र में कमी अभी चिंता का विषय नहीं है। इस इलाके में दूसरे राज्यों के मुकाबले वन का अनुपात ज्यादा था। केंद्र सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए दीर्घकालीन नीति बनाई है। लेकिन पर्यावरणविद् इसे खतरे की घंटी बता रहे हैं।

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