इस गर्भवती महिला को 8 बड़े अस्पतालों ने भर्ती करने से किया मना, 13 घंटे बाद बच्चे समेत महिला हुई मौत

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। 

कोरोना वायरस का खौफ लोगों के दिल में इस कदर घर कर चुका है कि वो अब इंसानियत पर हावी होने लगा है। मुंबई के बाद अब दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आ रही है।

दरअसल उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में नौ महीने की एक गर्भवती महिला को लेकर उसका परिवार 13 घंटे तक शहर के 8 बड़े अस्पतालों के चक्कर काटता रहा लेकिन सभी ने प्रसव के लिए उसे भर्ती करने से मना कर दिया। जिसके बाद गर्भवती महिला ने इलाज के अभाव में एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया।

8 बड़े अस्पतालों ने इस गर्भवती महिला को एडमिट नहीं किया

जानकारी के मुताबिक गाजियाबाद के खोड़ा कॉलोनी निवासी नीलम कुमारी (30 वर्ष) 8 महीने की गर्भवती थी। प्रसव दर्द उठने के बाद उसे ऑटो से एक अस्पताल ले जाया गया। नीलम के पति बृजेंद्र एक कंपनी में मेंटेनेंस डिपार्टमेंट में काम करते हैं। उनके भाई शैलेंद्र कुमार अपनी पत्नी सुषमा के साथ ऑटो से नीलम को लेकर नोएडा के सेक्टर 24 स्थित ईएसआईसी अस्पताल लेकर गए।

हद तो तब हो गई जब प्राइवेट अस्पताल के साथ-साथ सरकारी अस्पताल ने भी महिला को भर्ती करने से इंकार कर दिया। परिवार के मुताबिक, नोएडा के ईएसआई हॉस्पिटल, जिला अस्पताल, शारदा हॉस्पिटल, जिम्स, वैशाली मैक्स हॉस्पिटल, नोएडा फोर्टिस अस्पताल और शिवालिक हॉस्पिटल में महिला को ले जाया गया।

कोविड हॉस्पिटल भी महिला को एक बेड नहीं दे पाए

गौर करने वाली बात ये भी है कि इनमें जिम्स और शारदा हॉस्पिटल कोविड हॉस्पिटल हैं, यहां भी महिला को एडमिट नहीं किया गया। शारदा हॉस्पिटल ने यहां तक कह दिया कि बेड नहीं है। परिजनों का कहना है कि वे शुक्रवार की सुबह 6 बजे नीलम को लेकर घर से अस्पताल के लिए निकले थे, लेकिन 12 घंटे तक कई अस्पतालों का चक्कर लगाने के बाद भी किसी ने भर्ती नहीं किया।

शैलैंद्र ने मीडिया को बताया, “ईएसआईसी अस्पताल ने उसे कुछ समय के लिए ऑक्सिजन लगाई और फिर उसे सेक्टर 30 स्थित जिला अस्पताल में रेफर कर दिया गया लेकिन वहां के स्टाफ से उसे भर्ती नहीं किया। स्टाफ ने कहा कि हम खोड़ा से आए जो कंटेनमेंट जोन है इसलिए हमें वापस जाकर वहीं इलाज कराना चाहिए। उन्होंने नीलम को देखा तक नहीं।”

डीएम ने दिया जांच के आदेश

वहीं, डीएम सुहास एल वाई ने गर्भवती महिला की मौत के मामले में जांच के आदेश दिए हैं। अपर जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जांच सौंपी गई है। डीएम ने तत्काल जांच कर कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

जिला अधिकारी ने बताया कि मामले की जानकारी के बाद अपर जिलाधिकारी मुनींद्र नाथ उपाध्याय और मुख्य चिकित्सा अधिकारी दीपक को जांच के आदेश दिए गए हैं।

विपक्ष ने उठाए योगी सरकार पर सवाल

नीलम की मृत्यु का मामला जैसे ही वायरल हुआ विपक्ष ने योगी सरकार को घेरना शुरू कर दिया। प्रदेश के मुख्य मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ट्वीट किया।

ट्वीट में अखिलेश ने लिखा है, “उत्तर प्रदेश में प्रसव के लिए अस्पताल खोजते-खोजते एक गर्भवती महिला की मृत्यु अति दुखद है। सरकार यह बताए कि अगर वो कोरोना के लिए 1 लाख बेड के इंतज़ाम का दावा करती है तो आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ बेड आरक्षित क्यों नहीं रखे। भाजपा सरकार ये भी बताए कि उसने अब तक कितने अस्पताल बनाए हैं।”

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