एक 95 साल की बुजुर्ग महिला जो कोरोना से तो बच गईं लेकिन परिवार से हार गयी

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद स्थित गांधीनगर अस्पताल  में 93 साल की एक महिला ने कोविड-19 को तो मात दे दी, लेकिन परिवारवाले उन्हें घर ले जाने को तैयार नहीं हैं। और अब तो अस्पताल वाले भी उन पर घर जाने का प्रेशर बना रहे हैं।

दरअसल, अस्पताल प्रशासन के मुताबिक महिला अब ठीक हो चुकी हैं। लेकिन महिला को घर में ले जाने के बाद भी 14 दिन तक होम क्वारंटीन में रहना पड़ेगा।

एक फाईनल टेस्ट के बजाए 14 दिन के होम क्वारंटीन

राज्य में कोविड-19 के इलाज के लिए जारी दिशानिर्देशों के मुताबिक, किसी व्यक्ति का पॉजिटिव टेस्ट आने पर उसे अस्पताल में भर्ती किया जाता है, लेकिन ठीक होने के बाद एक बार दोबारा टेस्ट होने की बजाए उस व्यक्ति को घर जाकर 14 दिन के होम क्वारंटीन पीरियड में रहने का निर्देश दिया जाता है।

जिस वजह से महिला अभी भी हॉस्पिटल में ही हैं। परिजन एक बार और टेस्ट कराकर महिला को घर ले जाना चाहते हैं, जिससे कि वह उनके पूरी तरह से स्वस्थ होने को लेकर आश्वस्त हो सकें। लेकिन अस्पताल इसके लिए राजी नहीं है।

बुजुर्ग महिला को बेटे और दो नातियों के साथ भर्ती कराया था

बुजुर्ग महिला को उनके बेटे और दो नातियों के साथ हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। ये सभी कोरोना संक्रमित पाए गए थे। महिला के बेटे ने कोरोना की वजह से दम तोड़ दिया था, जबकि दोनों नाती अभी स्थिर हैं और होम क्वारंटीन हैं।

वहीं गांधी हॉस्पिटल में कोरोना वायरस के नोडल अधिकारी डॉक्टर प्रभाकर राव ने बताया, “हमने 62 पेशेंट्स को बेगमपेट में नेटर केयर हॉस्पिटल में शिफ्ट किया है। हम उन मरीजों के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने की कोशिश में लगे हैं, जो घर जाकर क्वारंटीन नहीं होना चाहते हैं।”

संक्रमण का डर मरीज को घर ले जाने से रोकता है

गांधी हॉस्पिटल की अथॉरिटी ने महिला को घर ले जाने को कहा लेकिन अमेरिका में रहने वाली नातिन के निवेदन पर कुछ और दिन रखने को तैयार हो गए थे। लेकिन अब अस्पताल प्रशासन के मुताबिक अब महिला पूरी तरह ठीक है।

एक अधिकारी ने बताया कि लोगों के मन में कोविड-19 के संक्रमण को लेकर बैठा डर उन्हें मरीज को घर ले जाने से तो रोकता ही है। साथ ही कई बार लोगों के पास मरीज को होम क्वारंटीन में रखने के लिए घर में अलग कमरा न होना भी एक बड़ी वजह है।

ऐसे में सरकार को चाहिए की वह होम क्वारंटीन की जगह वह इन मरीजों के लिए अलग से व्यवस्था करे। गांधी हॉस्पिटल का कहना है कि इस नियम की वजह से उन्हें आए दिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई केस आते हैं, जब मरीज के परिजन फिर से टेस्ट कर निगेटिव हो जाने की शर्त पर अड़ जाते हैं।

 

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