एक नज़र उन महिलाओं पर जो शारीरिक उत्पीड़न के बाद भी लॉकडाउन की वजह से साथ रहने को मजबूर हैं

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

आज सुबह से ये ख़याल आ रहा था कि इस लॉक डाउन की स्थिति में शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के मामले में इज़ाफा ही हुआ होगा क्योंकि सब घर में बंद हैं तब तक ब्रिटेन की एक रिपोर्ट सामने आ गयी।

जिसमें कहा गया है कि घर में साथ रहने के कारण महिलाओं के शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के मामले भी बढ़ गए हैं। अमरीका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में उत्पीड़न की शिकार महिलाओं की मदद के लिए बने राष्ट्रीय हॉटलाइन नंबर पर पिछले दो हफ़्तों में फ़ोन कॉल की बाढ़ सी आ गई है।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि महिलाएं अपने साथी के हाथों प्रताड़ना की शिकायत कर रही हैं लेकिन संयुक्त राष्ट्र की महिला इकाई की कार्यकारी निदेशक फुमज़िले म्लाम्बो एनगीका ने मीडिया को बताया है कि अमेरिका और ब्रिटेन के विपरीत विकासशील देशों में लॉकडाउन के दौरान इसके ठीक अलग स्थिति देखने को मिलेगी।

म्लाम्बो-एनगीका मीडिया को बताती हैं, “कई देशों में समाज के कमज़ोर और ग़रीब तबक़े से ताल्लुक़ रखने वाली महिलाओं के लिए अपने जीवनसाथी के हाथों उत्पीड़न की शिकायत कर पाना क़रीब क़रीब नामुमकिन होता है। इसकी वजह साफ़ है।

विकासशील देशों की ये ग़रीब महिलाएं, अपना उत्पीड़न करने वाले मर्दों के साथ एक या दो कमरों के मकान में रहने को मजबूर होती हैं। हम ये उम्मीद कर रहे हैं कि लॉकडाउन के दौरान, उत्पीड़न के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाली महिलाओं की आवाज़ ख़ामोश रहेंगी। वो इसकी शिकायत नहीं कर पाएंगी और ये बेहद चिंता की बात है।

वहीं पुराने रिकॉर्ड्स को याद करते हुए एनगीका बताती हैं कि अफ्रीका महाद्वीप के पश्चिमी हिस्से में जब इबोला वायरस का प्रकोप हुआ था, तो उसके कई महीनों बाद जा कर हमें पता चला था कि इस दौरान वहां घरों के अंदर महिलाओं के प्रति अपराधों में भारी बढ़ोत्तरी हुई थी।

भारत के आंकड़े अभी तक सामने आये नहीं हैं लेकिन गीता से बात करने पर पता लगता है कि यहां के भी हालात वही हैं बल्कि कहा जा सकता है वहां से भी बद्दतर है।

गीता की शादी को 12 बरस हो चुके हैं। गीता का पति उम्र में उनसे 11 साल बड़ा है, अब तो उन्हें गिनती भी याद नहीं कि उसने कितनी बार मारा-पीटा होगा। हां, ये ज़रूर याद है कि इसकी शुरुआत सुहागरात से ही हो गई थी। एक बार गीता ने अपने पति को छोड़ कर जाने की कोशिश की थी। लेकिन, उसके पति ने गीता को बच्चों को साथ ले जाने नहीं दिया।

गीता और उनका परिवार राजस्थान के दूसरे सबसे बड़े शहर जोधपुर के एक ग्रामीण और ग़रीब मुहल्ले में रहते हैं। उनका मकान बस एक बेडरूम का है। किसी आम दिन मे गीता, सुबह लगभग एक किलोमीटर चल कर जाती हैं, ताकि परिवार के लिए पानी का घड़ा भर कर ला सकें।


उसका पति एक ऑटो रिक्शाचालक है। जब से लॉक डाउन हुआ है तो गीता के पति की कमाई भी कम हो गयी है जिसके कारण वो अब फ्रस्ट्रेट रहता है। नॉर्मल दिनों में गीता का पति विजय रोज़ क़रीब पंद्रह सौ रुपये कमा लेता था। लेकिन, अब इस महामारी के चलते उसकी आमदनी घट कर हफ़्ते में महज़ 700 रुपये रह गई है। जिस कारण वो अब रोज़ शराब पी कर घर आता है और गीता को अब बच्चों के सामने मारता है।

ख़बर इनपुट-बीबीसी

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