90 साल पुरानी महामंदी के बाद ऐतिहासिक संकट में है दुनिया की अर्थव्यवस्था

वॉशिंगटन

आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा…कोरोना संकट अगले दो साल में विश्व की जीडीपी का नौ खरब डॉलर बर्बाद कर देगा

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्थाओं को इतना ज्यादा नुकसान हो रहा है कि इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था में तीन फीसदी की गिरावट आएगी। आईएमएफ ने इसे ‘साल 1930 की महामंदी’ यानी 90 साल के बाद के दशकों की सबसे खराब वैश्विक गिरावट करार दिया है। आईएमएफ का कहना है कि कोरोना वायरस की महामारी ने दुनिया को ‘ऐतिहासिक संकट’ में डाल दिया है।

संस्था ने ये भी कहा है कि कोविड-19 की महामारी लंबे समय तक बनी रही तो संकट को संभालने में सरकारों और केंद्रीय बैंकों की काबिलियत की असली परीक्षा होगी। आईएमएफ़ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा, “कोरोना संकट अगले दो साल में विश्व की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का नौ खरब डॉलर बर्बाद कर देगा।” हालांकि आईएमएफ़ ने दुनिया की अर्थव्यवस्था पर जारी किए गए अपने ताज़ा ‘वर्ल्ड इकॉनॉमिक आउटलुक’ में ब्रिटेन, जर्मनी, जापान और अमरीका जैसे देशों में उठाए गए ‘त्वरित और ठोस उपायों’ की सराहना की है। हालांकि ‘वर्ल्ड इकॉनॉमिक आउटलुक’ में ये भी कहा गया है कि कोई भी देश इस नुक़सान से बच नहीं पाएगा। अगर साल 2020 की दूसरी छमाही में कोविड-19 की महामारी पर काबू पा लिया गया तो अगले साल वैश्विक विकास 5.8 फ़ीसदी की दर संभल सकता है। गीता गोपीनाथ ने मंगलवार को कहा कि ‘ऐतिहासिक लॉकडाउन’ ने कोरोना संकट की वजह से ‘गंभीर अनिश्चितता’ का सामना कर रही सरकारों के सामने एक ‘मनहूस सच्चाई’ लाकर रख दी है। “साल 2021 में आंशिक भरपाई की संभावना जताई गई है। लेकिन जीडीपी की दर कोरोना से पहले वाले दौर से कम ही रहेगी। साथ ही हालात किस हद तक सुधर पाएंगे, इसे लेकर भी अनिश्चितता बरकरार रहेगी। मुमकिन है कि विकास के पैमाने पर बेहद ख़राब नतीजे आएं।”

भारत, अमेरिका और चीन का हाल

1930 की आर्थिक महामंदी के बाद ऐसा पहली बार हो सकता है कि विकसित और विकासशील देश दोनों ही मंदी के चक्र में फंस जाएं। विकसित देशों के मामले में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चेतावनी दी है कि इनकी अर्थव्यवस्थाएं कोरोना से पहले के दौर के उच्च स्तर को साल 2022 से पहले हासिल नहीं करने वाली हैं।

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