सीएए पर सरकार के बाद अब आरबीआई ने सुनाया अपना फैसला, लोगों में मचा हड़कंप

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी और एनपीआर को लेकर इस समय देशभर में सियासत गरमाई हुई है। देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इस बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से एनपीआर को लेकर दिए गए एक ताजा आदेश से हड़कंप मच गया और लोग आनन-फानन में बैंक से अपने रुपए निकालने के लिए दौड़ पड़े हैं।

दरअसल आरबीआई ने हाल ही में एक फैसला लिया कि बैंक में खाता खोलने के लिए केवाईसी वैरिफिकेशन के तहत एनपीआर लैटर को एक वैध दस्तावेज के तौर पर शामिल किया जाए, जिसे लेकर लोगों में हड़कंप मच गया है।

मामला तमिलनाडु के थुथुकुडी इलाके के पास के कयालपट्टिनम गांव का है। गांव में स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की स्थानीय ब्रांच ने आरबीआई के इस फैसले का पालन करते हुए एक विज्ञापन निकाला, जिसमें बताया गया कि खाता खोलते समय केवाईसी वैरिफिकेशन के लिए एनपीआर लैटर को भी एक वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाएगा।

इस विज्ञापन के जारी होने के तुरंत बाद गांव में हड़कंप मच गया और सैकड़ों की संख्या में लोग बैंक की शाखा पहुंचकर अपने रुपए निकालने लगे। रुपए निकालने वालों में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल थे।

हालांकि कई बैंकों ने अभी तक वैध केवाईसी दस्तावेजों की सूची में एनपीआर पत्र नहीं जोड़ा है। बैंक ऑफ बड़ौदा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसे अभी हमलोगों ने शामिल नहीं किया है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पब्लिक रिलेशन विभाग के सहायक महाप्रबंधक आर एल नायक ने कहा कि कयालपट्टिनम में जो हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण है।

सैकड़ों की संख्या में लोग लाइन में लग गए ताकि बैंक से पैसे निकाल सकें। बताया जा रहा है कि लाइन में लगे लोगों में ज्यादतर मुस्लिम थे। इस दौरान लोगों को नोटबंदी के दौरान हुए बुरे अनुभवों का भी डर सता रहा था। बैंक में भारी भीड़ देखकर बैंककर्मी असहाय नजर आए और वे लोगों को यह समझा नहीं सके कि क्यों आरबीआई ने एनपीआर को इस लिस्ट में शामिल किया है।

एक सरकारी कर्मचारी ने अपने खाते से लगभग 50,000 रुपये निकाले। उन्होंने कहा, “शाखा के लगभग सभी ग्राहक घबरा गए थे। हमें नोटबंदी का हाल मालूम है। कई दिनों तक हमें लाइन में लगना पड़ा था। ऐसे में विज्ञापन के बाद बैंक ग्राहक घबराकर पैसे निकालने ब्रांच में पहुंच गए। इस स्थिति में बैंक अधिकारी पूरी तरह असहाय दिख रहे थे क्योंकि वे हमें समझा नहीं पा रहे थे कि आरबीआई ने एनपीआर को सूची में क्यों शामिल किया है।”

admin