एम्बुलेंस ने मांगे एक हजार रु. तो गर्भवती पत्नी को लेकर 15 किमी पैदल चलकर पहुंचा घर

संजय त्रिपाठी | इंदौर

पंचवटी कॉलोनी, एरोड्रम रोड निवासी अशोक जाट की सास सुनीता कोरोना पॉजिटिव होकर आठ दिनों से एमआरटीबी में भर्तीहै। वे खुद ही उनकी सेवा में लगे हैं जबकि पत्नी कीर्ति गर्भवती है। परिवार में दो साल की बेटी कुक्कू है। सोमवार को उन्हें पत्नी को सोनोग्राफी के लिए एमवाय अस्पताल ले जाना था लेकिन कर्फ्यू के कारण आसान नहीं था।

दोपहर को वे पत्नी व बेटी के साथ पैदल एमवाय अस्पताल के लिए निकले। रास्ते में एक वाहन की मदद ली और फिर एक एम्बुलेंस से मदद लेकर मशक्कत के बाद अस्पताल पहुंचे। फिर दोपहर 3.30 बजे अस्पताल से घर रवाना होने के लिए निकले तो एम्बुलेंस चालकों ने मनाकर दिया। इस दौरान एक एम्बुलेंस चालक तैयार तो हुआ लेकिन इसके एवज में एक हजार रु. की मांग की। मजबूरन उन्हें पैदल ही घर के लिए रवाना होना पड़ा।

ढाई सौ से ज्यादा एम्बुलेंस, फिर भी नतीजा सिफर

प्रशासन ने 50 ओला कैब एम्बुलेंस के लिए जिले केस 25 स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। सरकारी, निजी अस्पतालों, सामाजिक संस्थाओं वा ओला कैब की मिलाकर करीब ढाई सौ से ज्यादा एम्बुलेंस हैं। इसके बावजूद उपलब्ध नहीं होने पर गर्भवती महिला का 15 किमी तक पैदल जाना व्यवस्था पर सवाल है। पिछले हफ्ते भी एक व्यक्ति एम्बुलेंस नहीं मिलने पर अपने बीमार को भतीजी के साथ स्कूटी से 6 किमी दूर एमवाय अस्पताल ले गया था जहां उसे मृत घोषित किया था।

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