ट्रेनिंग पर थे अंकित शर्मा, पिता ने एक नेता पर लगाया हत्या का आरोप

विभव देव शुक्ला। दिल्ली में जारी हिंसा फिलहाल भयावह सूरत ले चुकी है और अभी तक इसके थमने के कोई आसार नहीं नज़र आ रहे हैं। पिछले कई दिनों से जारी उपद्रव और आगजनी का नतीजा और किसी को नहीं बल्कि राजधानी के आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। हिंसा में अब तक न जाने कितनी जानें जा चुकी हैं और न जाने कितने लोग घायल हो चुके हैं। हिंसा के दौरान हमने तमाम जानें गँवाईं पर दो जानें ऐसी थीं जिनकी कीमत बहुत भारी थी।

जा रहे थे घर की ओर

उन दो नामों में सबसे ताज़ा नाम है अंकित शर्मा, इंटेलिजेंस ब्यूरो में सुरक्षा सहायक। अंकित अपना काम पूरा करके घर की ओर वापस लौट रहे थे उस समय से ही भीड़ उनका पीछा कर रही थी। चांदबाग पुल की तरफ पहुँचते ही भीड़ ने उन्हें घेर लिया और वहीं पर उनकी पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। अंकित शर्मा साल 2017 में इंटेलिजेंस ब्यूरो का हिस्सा बने थे और फिलहाल उनका प्रशिक्षण भी चल रहा था।

यह घटना मंगलवार के दिन हुई थी और उनके परिवार ने रात से ही उन्हें तलाशना शुरू कर दिया था। वह दिल्ली के खजूरी खास इलाके में अपने परिवार के साथ रहते थे और अभी वह अपना प्रशिक्षण पूरा कर रहे थे। अंकित शर्मा के पिता रवीन्द्र शर्मा भी इंटेलिजेंस ब्यूरो में कार्यरत थे और उन्होंने अपने बेटे की हत्या को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।

लगाया नेता पर आरोप

अंकित शर्मा के पिता का आरोप है कि आम आदमी पार्टी के नेता ने उनके बेटे की हत्या करवाई है। पहले उनके बेटे को कई लोगों ने जम कर पीटा और अंत में गोली मार दी। उनका कहना है इस घटना के पीछे जितने लोग ज़िम्मेदार हैं उन पर जल्द से जल्द कार्यवाई होनी चाहिए।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। दिल्ली में जारी हिंसा में अब तक लगभग 21 लोगों कि जान जा चुकी है और लगभग 100 लोग मारे जा चुके हैं। फिलहाल दिल्ली पुलिस हिंसा ग्रस्त इलाकों में मार्च कर रही है लेकिन अभी हालात सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर काम होने की ज़रूरत है।

हुई थी हवलदार की मौत

बीते दिनों प्रदर्शन की सूरत कुछ ऐसी हो गई थी कि एक हवलदार को अपनी जान तक गंवानी पड़ गई थी। उत्तर पूर्वी दिल्ली के गोकुलपुरी थाने में तैनात रतनलाल ने शायद ही सोचा होगा कि उनके साथ कुछ ऐसा होने वाला है।

विरोध और उपद्रव के बीच अपना काम कर रहे रतनलाल की हत्या कर दी गई। यह बात खुद में हैरान देने वाली है कि उपद्रव इतना कैसे बढ़ गया कि एक पुलिस वाले की जान पर बन आई। रतनलाल के परिवार में उनकी पत्नी और कुल 3 बच्चे थे।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी मौत के बाद परिवार का ज़िम्मा किस पर होगा? इस सवाल का जवाब शायद ही कोई दे पाए। मूल रूप से राजस्थान के सीकर के रहने वाले रतनलाल 1998 में बतौर हवलदार पुलिस महकमे में शामिल हुए थे और साल 2004 में उनकी शादी हुई थी।

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