इस बजट में ब्लू इकॉनमी को लेकर किये गए हैं बड़े फ़ैसले, युवाओं को इससे होगा फ़ायदा

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। 2020 का बजट आ चुका है इसमें तमाम बातें कही गयी हैं साथ ही इस बजट पर लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दर्ज़ करा रहे हैं। वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मछली पालने वालों के लिए ‘सागर मित्र योजना’ का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि ब्लू इकॉनमी को बढ़ावा देने के लिए ये योजना लाई जा रही है।

सीतारमण ने बताया कि सागर मित्र योजना के तहत 500 मछली उत्पादन संगठन बनाए जाएंगे। इसके तहत तटीय क्षेत्र के युवाओं को मछली पालन से जोड़कर रोज़गार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि साल 2022 तक मछली उत्पादन 200 लाख टन तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “तटीय क्षेत्र के युवाओं को मछली पालन से जोड़कर रोजगार दिया जाएगा, इसके लिए उन्हें ‘सागर मित्र योजना’ से जोड़ा जाएगा। वर्ष 2023 तक मछली उत्पादन 200 मीलियन टन बढ़ायेंगे।”

3077 सागर मित्र बनाए जाएंगे तथा तटवर्ती इलाकों के युवाओं को रोजगार मिलेगा। इससे पहले के बजट 2019-20 में मछली पालकों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज लेने पर 2 फीसदी का ब्याज सब्सिडी का प्रावधान किया था। इसके अलावा अगर वह अपना कर्ज समय पर चुकाते हैं तो उन्हें 3 फीसदी अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी भी देने का प्रावधान किया था।

सीतारमण ने संसद में 2019-20 का बजट पेश करते हुए यह कहा है, “मछली पकड़ने वाले और मछुआरा समुदाय खेती से करीब से जुड़े हुए हैं और ये ग्रामीण भारत के लिए बहुत अहम हैं। ” प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के जरिए प्राइस चेन को सुदृढ़ करने संबंधी महत्वपूर्ण खामियों का समाधान किया जाएगा। इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिकीकरण, पता लगाने की योग्यता, उत्पादन, उत्पादकता, पैदावार प्रबंध और गुणवत्ता नियंत्रण शामिल हैं।

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मछली पालन, पशुपालन, डेयरी का अलग से मंत्रालय बनाया गया था। तब इस मंत्रालय को कुल बजट में से 2,932.25 करोड़ रुपए पशुपालन और डेयरी को बढ़ावा देने के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं के लिए जबकि मछली पालन क्षेत्र की योजनाओं के लिए 804.75 करोड़ रुपये रखे गए थे।

ये ब्लू इकॉनमी क्या होती है?

भारत के कुल व्यापार का 90 फीसदी हिस्सा समुद्री मार्ग के ज़रिये होता है। समुद्री रास्तों, नए बंदरगाहों और समुद्री सामरिक नीति के जरिये अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना ही ब्लू इकोनॉमी कहलाता है। ये समुद्र से जुड़े संसाधनों के सस्टेनेबल इस्तेमाल से जुड़ी है, मतलब समुद्र के इको सिस्टम को नुकसान पहुंचाए बिना इससे फायदा लेना।

इसे समुद्र की अर्थव्यवस्था भी कही जा सकती हैं। ग्लोबल जीडीपी का तीन से पांच फीसदी हिस्सा समुद्रों से ही तय होता है इसलिए ब्लू इकॉनमी भारत के लिए बहुत ज़रूरी है। इसे अगला ‘सनराइज सेक्टर’ कहते हैं।

admin