23 रसायनों से चमकाए जा रहे राम मंदिर के काले पड़े पत्थर

फरीदाबाद

बरसों से खुले में पड़े पत्थरों पर जम गई काई, पुराना स्वरूप लौटाने में लगेंगे 3 माह

औद्योगिक नगर फरीदाबाद राम लला मंदिर में कार सेवा के साथ ईंट दान में आगे रहा है। अब इस शहर का नाम प्रभु श्री राम लला के अयोध्या स्थित मंदिर के निर्माण से सीधे जुड़ गया है। यहां की एक कंपनी राम लाल मंदिर के पुराने और पीले-काले पड़ गए पत्थरों को आधुनिक तकनीक से चमकाने का प्रयास कर रही है, ताकि राम लला के भव्य मंदिर का निर्माण हो सके।

सेक्टर-19 निवासी रामभक्त संदीप गर्ग के नेतृत्व में उनकी कंपनी केएलए कंस्ट्रक्शन अयोध्या में राम लला के पत्थरों को चमकाने का काम कर रही है। पत्थरों को साफ करने के लिए स्टोन क्लीनर, एल्गो रिमूवर, स्टेन रिमूवर, रस्ट रिमूवर, सीमेंट रिमूवर, पेंट रिमूवर सहित 23 प्रकार के रसायनों का उपयोग किया जा रहा है। जो पत्थर तराशे गए हैं, उनकी आयु लगभग एक हजार साल है।

श्री राम जन्मभूमि न्यास के महासचिव ने संदीप गर्ग की इस कंपनी की विशेषज्ञता को देखते हुए इस कार्य के लिए अनुबंधित किया है। पत्थरों को चमकाने लिए जर्मन कंपनी एकेमी सहित कई देसी-विदेशी कंपनियों ट्रायल दिया था। इसमें फरीदाबाद की केएलए कंपनी का चयन किया गया। मंदिर की कार्यशाला में राम मंदिर की एक मंजिल के लिए करीब सवा लाख घन फुट पत्थर तराशकर रखे गए हैं। इनकी साफ-सफाई में करीब तीन माह लगेंगे। लगभग 28 वर्षों से खुले आसमान में पड़े होने के कारण इन पत्थरों ने धूप, बरसात, गर्मी-सर्दी, सब कुछ सहन किया है। इसलिए इन पत्थरों पर काई जम गई है और इनका रंग-रूप बिगड़ गया है।

जरा भी असावधानी बरतने से टूट सकते हैं पत्थर

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि हम स्वदेशी के पोशक हैं। इसीलिए स्वदेशी कंपनी का चयन किया गया है। श्री राम जन्मभूमि न्यास के ट्रस्टियों के साथ केएलए कंस्ट्रक्शन के सीईओ संदीप गर्ग ने कार्यशाला का निरीक्षण करते हुए कहा कि ट्रायल के बाद कुछ पत्थर ऐसे चमक गए हैं कि जैसे उन्हें अभी तराश गया हो। मंदिर कार्यशाला में दर्शन के लिए आने वाले कुछ भक्तों ने पत्थरों पर अपने नाम अंकित कर दिए थे। नामों को हटाना भी कठिन सिद्ध हो रहा है। जरा भी असावधानी पत्थरों को चटका सकती है।

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