सरोज जी के नृत्य की थिरकन को दोहराता रहेगा बॉलीवुड !

सुभाष घई।

मुझे वह दिन याद है जब मुझे कर्ज के बाद अरुणा ईरानी ने उनसे मिलवाया था। मैंने उन्हें अपनी फिल्म विधाता का एक क्लाइमेक्स गाना करने के लिए कहा। उनसे कहा था कि अरुणा जी का दावा है कि आप बेहतरीन कोरियोग्राफर हैं, आप इसे साबित करिये। अगर आपने खुद को साबित किया तो मैं आपको मेरे बैनर की एक पूरी फिल्म देने का वादा करता हूं। गाने की शूटिंग के दौरान सरोज जी ने मुझे वास्तव में प्रभावित किया। वो 1982 का साल था, वे शायद पहली महिला नृत्य निर्देशक थी जिनसे मैं मिला।

अगली बार मैंने उन्हें अपनी नई फिल्म हीरो के लिए मीनाक्षी शेषाद्री और जैकी श्रॉफ को सिखाने के लिए आमंत्रित किया। हीरो एक बड़ी हिट साबित हुई। वे किसी भी नए स्टार्स को ट्रेंड करने के लिए बहुत अच्छी थीं। उन्होंने कई बड़े स्टार्स को कैमरे के सामने नृत्य कराया। इसके बाद ही मैंने फिल्मफेयर को कोरियोग्राफरों के लिए एक पुरस्कार देने पर जोर दिया। फिल्मफेयर ने इसे माना। भारतीय सिनेमा के सिने कोरियोग्राफरों के इतिहास में पहले फिल्मफेयर पुरस्कार से सरोज जी को सम्मानित किया गया। इसके बाद हम दोनों ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। हमने साथ-साथ आखिरी बार 2015 में फिल्म “कांची’ में काम किया। उस वक्त भी सरोज जी ने वही निष्ठा और समर्पण दिखाया जो शुरुआती दिनों में रहा।

सरोज जी वैसे तो हर शैली में पारंगत नर्तकी और कोरियोग्राफर थीं। लेकिन नए लोगों को संभालने और स्क्रीन पर एक्ट्रेस को सबसे खूबसूरत ढंग से प्रस्तुत करने में वे मास्टर थीं। मेरे मामले में, चाहे वह मीनाक्षी शेषाद्री, माधुरी दीक्षित, मनीषा कोईराला, महिमा, करीना कपूर हों या ईशा श्रावणी। मैंने अनुभव किया कि वह पुरुष अभिनेताओं की छवि बनाने में भी सुपर प्रतिभाशाली थी। मेरी जंग में “बोल बेबी बोल’ में जावेद जाफरी के रूप में या “माई नेम इज लखन’ में अनिल कपूर या संजय दत्त के “खलनायक हूं’ के गीतों पर किये नृत्य इन अदाकारों के जीवन में यादगार हैं।

वह भारतीय शास्त्रीय नृत्यों को परदे पर उकेरने में सबसे भरोसेमंद कोरियोग्राफर थीं। उन्होंने आखिरकार ऐश्वर्या राय के साथ मेरी फिल्म “ताल’ में एक क्लासिक उपलब्धि हासिल की और माधुरी और ऐश्वर्या को एक साथ “देवदास’ में “डोला रे डोला’ गीत में नायक के रूप में प्रस्तुत किया।

मेरे लिए हर गीत कठिन था और हर बार एक अलग चुनौती लेकिन सबसे बड़ी चुनौती फिल्म “कृष्णा’ थी जब मैंने भीड़ में नर्तकियों और अभिनेताओं के एक पूरे समूह के साथ “वो किसना है’ का चित्रण किया। मैं कोरियोग्राफी के मामले में इस शानदार गाने को लेकर बहुत चिंतित था लेकिन वे मुझे समझती थी। ये सरोज खान ही थी जिन्होंने इसे किया और मुझे आज तक एक अच्छी तरह से डिजाइन किए गए भारतीय कोरस नृत्य पर गर्व है। वह हमेशा मुक्ता आर्ट का अभिन्न अंग थी।

अंत में – अब कोई सरोज खान नहीं होगी। एक युग चला गया। उनका काम पीढ़ियों तक याद किया जाएगा। उनके काम से सीखकर भविष्य में कई नए कलाकार शास्त्रीय नृत्य सीखेंगे।
श्रद्धांजलि सरोज

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