बस इक निगाह-ए-करम है काफ़ी

– शकील बँदायूनी

03 अगस्त 1916 को उत्तर प्रदेश के बदायूँ में जन्म। कई फिल्मों के मशहूर गीतकार। 20 अप्रैल 1970 को निधन।

बस इक निगाह-ए-करम है काफ़ी
बस इक निगाह-ए-करम है काफ़ी
अगर उन्हें पेश-ओ-पस नहीं है
ज़ाहे तमन्ना की मेरी फ़ितरत
असीर-ए-हिर्स-ओ-हवस नहीं है
नज़र से सय्याद दूर हो जा यहाँ
तेरा मुझ पे बस नहीं है
चमन को बर्बाद करनेवाले
ये आशियाँ है क़फ़स नहीं है
किसी के जल्वे तड़प रहे हैं
हुदूद-ए-होश-ओ-ख़िरद के आगे
हुदूद-ए-होश-ओ-ख़िरद के आगे
निगाह के दस्तरस नहीं है
जहाँ की नयरन्गीयों से यक्सर
बदल गई आशियाँ की सूरत
क़फ़स समझती हैं जिन को नज़रें
वो दर-हक़ीक़त क़फ़स नहीं है
कहाँ के नाले कहाँ की आहें
जमी हैं उन की तरफ़ निगाहें
कुछ इस क़दर महव-ए-याद हूँ मैं
कि फ़ुर्सत-ए-यक-नफ़स नहीं है

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