सीबीएसई बोर्ड एग्जाम में अब आपके बच्चे नहीं होंगे ‘फेल’

नई दिल्ली

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने परीक्षा में फेल होने वाले विद्यार्थियों के मन से नकारात्मक भाव खत्म करने का फैसला किया है। बोर्ड ने कक्षा 10वीं और 12वीं के अंकपत्र (मार्क्सशीट) में बदलाव करने का फैसला किया है। यह बदलाव आने वाले सत्र में उन विद्यार्थियों के लिए होगा जिनके अंकपत्र में किसी कारणवश परीक्षा में बेहतर अंक नहीं ला पाने पर फेल लिखा मिलता है।

बोर्ड ने इस शब्द को बदलने का सोचा है। बोर्ड ने सभी संबद्ध स्कूलों के प्राचार्य से जानकारी मांगी है कि फेल की जगह किस शब्द का इस्तेमाल किया जाए। इसके लिए सुझाव देते हुए कहा है कि शब्द ऐसा हो जिससे बच्चों के मन में नकारात्मक भाव ना आए। इस शब्द को पढ़ने के बाद असफल होने की बात तो पता चले पर भविष्य में सफल होने का उत्साह भी बना रहे। इसके अलावा बोर्ड ने कंपार्टमेंट शब्द भी बदलने का निर्णय किया है।

दरअसल, सीबीएसई जब रिजल्ट जारी करता है तो सभी परीक्षार्थियों को रिजल्ट देता है। इसमें उत्तीर्ण और अनुत्तीर्ण दोनों विद्यार्थी शामिल होते हैं। इसके अलावा वे विद्यार्थी भी शामिल होते हैं जो एक या दो विषय में फेल हो जाते हैं और उन्हें कंपार्टमेंटल परीक्षा में शामिल होना होता है।

सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज का कहना है कि परीक्षा के अंकपत्र में फेल शब्द अक्सर बच्चों को असफल होने का अहसास कराता है। अगर एक बार बच्चे को असफल होने का अहसास हो जाता है तो उसको उस स्थिति से बाहर निकालना बहुत कठिन हो जाता है। बच्चा डिप्रेशन की स्थिति तक में चला जाता है और उसे लगने लगता है कि अब वो आगे भविष्य में कुछ नहीं कर पाएगा। कुछ बच्चे तो आत्महत्या जैसा घातक कदम भी उठा लेते हैं। ऐसे में बच्चों को उत्साह देने की जरूरत है। इसलिए एक ऐसा प्रस्ताव रखा गया है कि अंकपत्रिका में फेल शब्द को बदलकर कोई दूसरा शब्द लिखा जाए, जिससे बच्चों पर कोई नकारात्मक असर न पड़े। सीबीएसई की मीडिया हेड रमा शर्मा ने बताया कि बोर्ड ने अंकपत्रिका में यह बदलाव करने का प्रस्ताव रखा है।

ये शब्द किए जा सकते हैं इस्तेमाल

सूत्रों के मुताबिक कंपार्टमेंटल की जगह वहां पर सप्लीमेंट्री परीक्षा जैसे शब्द लिखे जा सकते हैं। इसके अलावा सेकेंड एग्जाम या विशेष परीक्षा का भी नाम कंपार्टमेंटल परीक्षा को दिया जा सकता है। इसके अलावा फेल शब्द की जगह नॉट-क्वालीफाई (अयोग्य) जैसे शब्द दिए जा सकते हैं। जिन शब्द पर प्राचार्यों की सलाह अधिक आएगी, उसे लागू किया जाएगा। सभी प्राचार्य को चार शब्द भेजने को कहा गया है। बोर्ड की मानें तो बोर्ड रिजल्ट के अलावा अंकपत्र के बदलाव को स्कूल की वार्षिक परीक्षा में भी लागू किया जाएगा। स्कूल स्तर पर भी अंक पत्र या रिपोर्ट कार्ड में फेल शब्द को हटाने की तैयारी है, लेकिन पहले यह बोर्ड रिजल्ट में लागू किया जाएगा।

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