चीन पर आरोप है कि उसने डब्ल्यूएचओ से कोरोना की जानकारी छुपाने की अपील की

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।  

दुनिया भर में कोरोना संक्रमण के मामले में काफी तेजी से वृद्धि हो रही है। वहीं एक चौकाने वाली खबर चीन से आ रही है। अब बताया जा रहा है कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने व्यक्तिगत रूप से विश्व स्वास्थ्य संगठन चीफ से कहा था कि वह कोरोना वायरस महामारी को लेकर वैश्विक चेतावनी जारी करने में देरी करें। यह आरोप जर्मनी की खुफिया एजेंसी ने लगाया है।

डब्ल्यूएचओ पर कैसे आरोप लगाए गए

इंडियन एक्सप्रेस एजेंसी ने कहा है कि बीएनडी के मुताबिक, 21 जनवरी को चीन के नेता शी चिनफिंग ने डब्ल्यूएचओ चीफ टेड्रोस ए. गेबेरेयेसस से कहा कि वह कोरोना वायरस के इंसान से इंसान में फैलने की सूचना को रोके और महामारी की चेतावनी देर से जारी करें। हालांकि, इस मामले में मैगजीन के खबर प्रकाशन के बाद डब्ल्यूएचओ ने इसका खंडन करते हुए कहा कि इसमें कोई भी सच्चाई नहीं है।

सारे आरोपों को खारिज करते हुए डब्ल्यूएचओ ने ये कहा

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, “डॉ. टेड्रोस और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच 21 जनवरी को कोई बात नहीं हुई है और उन्होंने कभी फोन पर बात नहीं की है। ऐसी गलत रिपोर्ट दुनिया से महामारी मिटाने के प्रयास से डब्ल्यूएचओ का ध्यान भटकाती है।”

बयान में कहा गया है कि चीन ने कोरोना वायरस के ह्यूमन टू ह्यूमन ट्रांसमिशन की जानकारी 20 जनवरी को ही दे दी थी। इसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से 22 जनवरी को बयान जारी किया गया था कि वुहान के मामलों की पड़ताल करने के बाद संगठन को कोरोना के एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलने की जानकारी मिली है।

ट्रंप ने भी लगाया था आरोप

वहीं, अगर जर्मनी की खुफिया एजेंसी का दावा सही निकला तो यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राय को बल देगा जिनका मानना है कि डब्ल्यूएचओ चीन सेंट्रिक रहा है।

इसके पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप विश्व स्वास्थ्य संगठन को लेकर हमले करते रहे हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि डब्ल्यूएचओ की नीतियां चीन केंद्रित होती हैं। अप्रैल में ट्रंप प्रशासन की तरफ से कहा गया था कि डब्ल्यूएचओ चीन के प्रोपेगैंडा फैलाने का औजार बन चुका है।


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