अरबों टिड्डियों से जंग के लिए चीन उतारेगा अपनी ‘डक सेना’

बीजिंग

पिछले 60 साल में पहली बार रेगिस्तानी टिड्डियों के भीषणतम अटैक का सामना करने के लिए चीन ने एक अनोखा तरीका अपनाया है। अफ्रीका और एशिया के कई देशों में फसलों का सफाया करने वाले टिड्डे अब भारत पाकिस्तान के रास्ते चीन की ओर बढ़ रहे हैं। इन टिड्डियों की फौज से जंग के लिए चीन अपनी एक लाख ‘डक फोर्स’ को मैदान में उतारने जा रहा है।

पाकिस्तान से आने वाले इस महासंकट से निपटने के लिए चीन ने अपनी ‘डक फोर्स’ को सीमा पर भेज दिया है। इस चीनी फोर्स में एक लाख बतख शामिल हैं। दरअसल, बतख एक तरीके से ‘जैविक हथियार’ हैं और कीटनाशक से ज्यादा प्रभावी होती हैं। हालांकि हिमालय के होने की वजह से चीन पर टिड्डियों के हमले का खतरा कम है, फिर भी चीन अपनी तैयारी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है। यही नहीं टिड्डियों के खात्मे के लिए बतख का इस्तेमाल पर्यावरण के लिहाज से भी अच्छा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एक बतख प्रतिदिन 200 टिड्डियों को खा सकती है। टिड्डियों के हमले से बचाव के लिए बतखों को पाकिस्तान भेजने से पहले इनका चीन के पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में परीक्षण शुरू होगा। बताया जा रहा है कि 360 अरब टिड्डियों की फौज ने पूर्वी अफ्रीका को बर्बाद करने के बाद सऊदी अरब के रास्ते पाककिस्तान और भारत में प्रवेश किया है। चीन के शिंजियांग प्रांत में बतखों और मुर्गियों का पालन किया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक एक बतख 4 वर्ग मीटर के इलाके को टिड्डियों के आतंक से मुक्त कर सकती है।

पाक की 9 लाख हेक्टेयर जमीन पर टिड्डों का आतंक

पाकिस्तान के 9 लाख हेक्टेयर जमीन पर टिड्डियों ने आतंक मचा रखा है। सिंध के किसानों के नेता जाहिद भुरगौरी कहते हैं कि टिड्डियों के हमले में 40 फीसदी फसल नष्ट हो गई है। गेहूं, कपास और टमाटर की फसलें बर्बाद हो गई हैं। आटे के संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की टिड्डियों ने समस्या कई गुना बढ़ा दी है। टिड्डियों से जारी इस जंग में अब जीत के लिए पाकिस्तान को भारत की मदद लेनी पड़ रही है। पाकिस्तान सरकार का अनुमान है कि इस संकट से निपटने के लिए उसे 7.3 अरब पाकिस्तानी रुपयों की जरूरत होगी।

राजस्थन में 3.6 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद

टिड्डियों के आतंक से भारत के राजस्थान, गुजरात और पंजाब के कई जिले प्रभावित हैं। राजस्थान में किसानों की फसलों पर टिड्डों का कहर जारी है। पश्चिमी राजस्थान के 10 जिलों की कम से कम 3.6 लाख हेक्टेयर की फसल को टिड्डों ने नुकसान पहुंचाया है और अभी यह आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है। बताया जा रहा है कि पिछले 60 सालों में यह नुकसान सबसे ज्यादा है। कई जिलों में तो आधे से ज्यादा फसलें बर्बाद हो गई हैं और किसान इनके आगे लाचार नजर आ रहे हैं। श्रीगंगानगर जिले में टिड्डों ने खेतों में खड़ी फसल का 75 पर्सेंट हिस्सा बर्बाद कर दिया है।

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