एलएसी पर तैनात कमांडर सैनिकों को गोली चलाने के आदेश के बाद आयी चीनी अखबार की धमकी

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

लद्दाख में गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद भारत ने एक्चुअल लाइन ऑफ कंट्रोल पर सख्ती बढ़ा दी, जिसके बाद चीन बौखला गया है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने धमकी भरे लहजे में लिखा है कि भारत जानता है कि चीन के साथ जंग नहीं की जा सकती है।

भारतीय सैनिकों को नियंत्रण रेखा पर असाधारण परिस्थितियों में हथियार के इस्‍तेमाल करने की छूट मिलने के बाद ग्लोबल टाइम्स ने भारत के खिलाफ धमकी भरा लहजा अपनाया है।

चीन के खिलाफ राष्ट्रवाद और शत्रुता तेजी से बढ़ रही है

चीनी अखबार ने धमकी दी कि अगर भारतीय सैनिकों ने गोली चलाने की हिमाकत की तो हम इसका मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं। चीनी अखबार ने अपने संपादकीय में वर्ष 1962 के युद्ध की याद दिलाते हुए कहा कि आज चीन की सेना और अर्थव्‍यवस्‍था दोनों ही भारत से ज्‍यादा मजबूत है।

ग्लोबल टाइम्स ने एक चीनी विश्लेषक के हवाले से लिखा है कि गलवान घाटी में सीमा विवाद के बाद भारत में चीन के खिलाफ राष्ट्रवाद और शत्रुता तेजी से बढ़ रही है। जबकि चीनी विश्लेषकों और भारत के भीतर भी कुछ लोगों ने चेतावनी दी थी कि भारत को पहले अपने घर में राष्ट्रवाद को शांत करना चाहिए।

गोली चलाने का आदेश सच हुआ तो हालात और बदतर होंगे

ग्‍लोबल टाइम्‍स ने लिखा, “अगर गोली चलाने का आदेश सच साबित हुआ तो ताजा घटनाक्रम भारतीय-चीन सीमा पर दोनों सेनाओं के बीच हुए विश्‍वास बहाली के समझौते का गंभीर उल्‍लंघन होगा। सीमा पर झड़प कभी-कभी होती है और दोनों ही देशों ने कई दशकों से गोली नहीं चलाई है। अगर भारतीय सैनिकों ने भविष्‍य में चीनी सैनिकों के खिलाफ हथियारों का इस्‍तेमाल किया तो सीमाई इलाकों में तस्‍वीर इससे उलट होगी।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा था कि उनकी सरकार ने सशस्त्र बलों को कोई भी आवश्यक एक्शन लेने की पूरी आज़ादी दी है. हालांकि पीएम मोदी तनाव को कम करने की कोशिश करते हुए भी दिखाई दिए।

पीएम ने कहा था चीनी सेना ने सीमा में घुसपैठ नहीं की है

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि लद्दाख में गलवान घाटी में झड़प पर पीएम मोदी ने कहा है, “किसी ने भी हमारी सीमा में घुसपैठ नहीं की है, न ही अब वहां कोई है, और न ही हमारे पोस्ट पर कब्जा किया गया है।”

अखबार ने धमकी भरे लहजे में आगे कहा, “मैं भारत के राष्‍ट्रवादियों को चेतावनी देना चाहता हूं कि यदि आपके सैनिक बिना हथियारों के युद्ध में जीत नहीं सकते हैं तो हथियार उनकी मदद नहीं करेगा। इसकी वजह यह है कि चीन की सैन्‍य ताकत भारत से ज्‍यादा आधुनिक और मजबूत है। हम यह बताना चाहेंगे कि 1962 से आज की स्थिति ज्‍यादा अलग नहीं है। चीन की जीडीपी भारत की पांच गुना और चीन का सैन्‍य खर्च भारत का तीन गुना ज्‍यादा है।”

विदेश मंत्री ने कहा था समझौते के कारण गोली नहीं चलाई

देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि दोनों पक्षों की सेनाएं 1996 और 2005 में एक द्विपक्षीय समझौतों के प्रावधानों के अनुसार टकराव के दौरान हथियारों का इस्तेमाल नहीं करती हैं। 15 जून को गलवान में हुई झड़प के दौरान भारतीय जवानों ने इसलिए हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया था।

सरकार के नए नियमों के अनुसार, एलएसी पर तैनात कमांडर सैनिकों को सामरिक स्तर पर स्थितियों को संभालने और दुश्मनों के दुस्साहस का ‘मुंहतोड़’ जवाब देने की पूरी छूट होगी।

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