कोरोना महामारी… देश के टॉप बिजनेसमैन ने त्याग दिया वेतन

नई दिल्ली

अर्थव्यवस्था को संभालने की कवायद … लागत कम कर घाटे की भरपाई करने के लिए लिया फैसला

कोरोना वायरस महामारी से भारत को बचाने के लिए देश के कई बड़े औद्योगिक घरानों के मुखियाओं ने अपनी सैलरी में कटौती करने का फैसला लिया है ताकि इस मुश्किल घड़ी में लागत को कम करके घाटे की भरपाई की जा सके। लॉकडाउन से कारोबारियों गतिविधियों पर कहर बरपा है और इसके चलते देश की अर्थव्यवस्था को करारा झटका लगा है। आइए आपको बताते हैं कि किन दिग्गज बिजनेसमैन ने अपनी सैलरी का किया कितना त्याग। सैलरी में कटौती की है। इस लिस्ट में मुकेश अंबानी, उदय कोटक से लेकर आनंद महिंद्रा तक के नाम शामिल हैं।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कोरोना वायरस महामारी के खत्म हो जाने तक कोई सैलरी न लेने का फैसला किया है। अंबानी की सैलरी सालाना 15 करोड़ रुपये है, जिसमें साल 2008-09 के बाद से कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। कंपनी ने एक बयान में कहा, कोविड-19 के प्रभाव के समाप्त होने तक सैलरी न लेने के मुकेश अंबानी के प्रस्ताव को बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। भारत में कोविड-19 के प्रकोप के मद्देनजर, जिसने राष्ट्र के सामाजिक, आर्थिक व औद्योगिक क्षेत्र को प्रभावित किया है। उन्होंने तब तक सैलरी न लेने का निश्चय किया है, जब तक उनकी कंपनी और इसके सारे बिजनेस सम्पूर्ण तरीके से अपनी कमाई करने की क्षमता को दोबारा हासिल नहीं कर लेते।

उदय कोटक

प्राइवेट बैंक कोटक महिंद्रा ने कर्मचारियों की सैलरी में 15 फीसदी की कटौती का फैसला लिया है। इसके अलावा बैंक के सीईओ उदय कोटक ने एक साल तक सिर्फ 2 रुपया महीना सैलरी लेंगे।

रितेश अग्रवाल

होटल कंपनी ओयो रूम्स के संस्थापक और सीईओ रितेश अग्रवाल ने पूरे साल कोई सैलरी न लेने का फैसला लिया है ताकि संकट में कंपनी को दोबारा खड़ा किया जा सके।

आनंद महिंद्रा

दिग्गज ऑटो कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने कोरोना वायरस महामारी के संकट से कंपनी को बचाने के लिए 100 फीसदी सैलरी कट का
फैसला लिया है

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