कोरोना अब बनारसी साड़ी पर, निर्यात पर रोक से मुश्किल में कारोबार

वाराणसी

कोरोना वायरस से चीन का व्यापार पूरी तरह से ठप्प हो गया है लेकिन अब इसका असर भारतीय बाजारों पर दिखने लगा है। दरअसल चाइनीज रेशम के निर्यात पर रोक लगने से पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बनारसी साड़ी इंडस्ट्री में कामकाज मंदा हो गया है। इससे वाराणसी के 4.5 लाख से ज्यादा लोगों की आजीविका पर संकट के बादल दिख रहे हैं। ज्यादातर बनारसी साड़ी और ड्रेस मटेरियल में इस्तेमाल होने वाला चाइनीज रेशम अगर देश में आना जल्द शुरू नहीं हुआ तो बनारसी साड़ी का कारोबार टूटने लगेगा।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि कोरोना वायरस की वजह से चीन सरकार ने चीनी रेशम के बाहरी मुल्कों में निर्यात पर रोक लगा दी है। सिर्फ बनारस में ही लगभग 7 से 8 टन रेशम रोजाना खपत हो जाता है। अगर कोरोना वायरस के चलते चाइनीज रेशम पर लगी रोक नहीं हटती है तो आगे उनका व्यापार प्रभावित होगा। इतना ही नहीं, वे बताते हैं कि इससे वाराणसी साड़ी उद्योग को प्रतिमाह डेढ़ से पौने दो सौ करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है।

जिसके पास स्टॉक उसे कोई परेशानी नहीं

सिर्फ वाराणसी में ही हैंडलूम, सेमी हैंडलूम और पावर लूम को मिलाकर 80 हजार की संख्या है, जिसका बेसिक रॉ मटीरियल रेशम है। उन्होंने कहा कि अधिकतर मटीरियल चाइनीज रेशम के रूप में होता है, जिसे चीन से आयात किया जाता है। उन्होंने कहा कि जिसके पास स्टॉक है वह आराम से बेच रहा है या साड़ी निर्माण करा रहा है, लेकिन नए ऑर्डर के लिए अगर चाइनीज रेशम रॉ मटीरियल के रूप में नहीं है तो साड़ी उद्योग की क्रेडिबिलिटी और मैन्युफैक्चरिंग दोनों पर ही असर पड़ रहा है।

बनारसी साड़ी उद्योग से जुड़े हैं 4.5 लाख लोग

अगर चाइनीज रेशम पर लगी रोक नहीं हटती है तो बनारसी साड़ी उद्योग प्रभावित होगा। उन्होंने बताया कि बनारसी साड़ी उद्योग से बनारस में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से लगभग 4.5 लाख लोग जुड़े हुए हैं और उनकी आजीविका उसी पर आधारित है। इसलिए साड़ी निर्माण पर अगर कोई प्रभाव पड़ता है तो उसका असर अन्य चीजों पर भी दिखना शुरू हो जाएगा। सबकी चिंता यही है कि चाइनीज रेशम पर से रोक हटे और वायरस का प्रकोप खत्म हो, नहीं तो बनारसी साड़ी उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ जाएगा।

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