मध्यप्रदेश में कोरोना का ग्रोथ रेट आब सिर्फ 2 फीसदी,रिकवरी रेट बढ़कर हुआ 76.52

विनोद शर्मा | इंदौर

महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, उत्तरप्रदेश तमिलनाडु के हालात दिनोंदिन बिगड़ रहे । इधर प्रदेश में बड़ी राहत… पहले दिन से टॉप-फाइव में रहे मध्यप्रदेश में पिछले एक महीने में हालत में तेज़ी से सुधार, संक्रमण भी घटा और रिकवरी भी दुगुनी

प्रदेश से कोरोना संकट के बादल छटते नजर आ रहे हैं। सबसे बड़े एपिसेंटर इंदौर में 73 दिन बाद इकाई में पॉजिटिव मरीज मिले हैं, वहीं मालवा-निमाड़ के अन्य जिलों में कोरोना ने जितनी तेजी से दस्तक दी थी, उतनी ही तेजी से पैर भी सिकोड़े हैं। इंदौर में रिकवरी रेट 73 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वहीं संभाग के धार जिले में 95 प्रतिशत लोग डिस्चार्ज होकर घर जा चुके हैं।

मार्च से लेकर अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक देश में कोरोना के जो बड़े सेंटर थे, उनमें महाराष्ट्र और दिल्ली के साथ मध्यप्रदेश टॉप-5 में था। 15 मई से 15 जून के शिवराज सरकार और उनके अफसरों ने कोरोना के खिलाफ जो होमवर्क किया उसके परिणाम अब दिख रहे हैं। 28 अप्रैल को कोरोना का जो ग्रोथ रेट 10.3 प्रतिशत था वह 15 जून को घटकर सिर्फ 2 प्रतिशत है। वही रिकवरी रेट 35 से बढ़कर 76.52 प्रतिशत हो गया। महाराष्ट्र और दिल्ली के बाद राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के साथ उत्तर प्रदेश की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। अभी प्रदेश में कुल 10935 संक्रमितों में से 2567 पॉजिटिव उपचाररत हैं। बाकी 75 प्रतिशत डिस्चार्ज हो चुके हैं।

इंदौर में जिस तेजी से हालात बिगड़े थे, उसी तेजी से ठीक भी हुए। यहां 989 ही एक्टिव केस हैं। इंदौर संभाग में बुरहानपुर अप्रैल के अंतिम सप्ताह में संक्रमित होना शुरू हुआ था और इसी दौरान नीमच में भी संक्रमण पहुंचा। बुरहानपुर में 82 और 73 प्रतिशत मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं। इससे कोरोना के खिलाफ मजबूत चिकित्सा सुविधाओं और त्वरित उपचार का अंदाजा लगाया जा सकता है।

 

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