महाराष्‍ट्र के गवर्नर के उद्धव को ‘आप सेकुलर हो गए हैं’ वाले पत्र पर शाह बोले- ऐसे शब्दों के चयन से बचा जा सकता था

नई दिल्ली. महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की ओर से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे गए हालिया विवादास्पद पत्र  के बारे में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि कोश्यारी अपने शब्दों का और बेहतर ढंग से इस्तेमाल कर सकते थे. दरअसल कोश्यारी ने मुख्यमंत्री ठाकरे को लिखे पत्र में सवाल किया कि क्या आप धर्मनिरपेक्ष  हो गये हैं. एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी के साथ एक खास इंटरव्यू  में, शाह ने कई विषयों पर चर्चा की, जिसमें महाराष्ट्र में अपने पूर्व सहयोगी शिवसेना के साथ भाजपा (BJP) के राजनीतिक संबंधों का मुद्दा भी शामिल था. कोशियारी ने इस सप्ताह की शुरुआत में ठाकरे को उनकी भगवार राम की भक्ति की याद दिलाते हुए पत्र लिखा था. दरअसल राज्य की कमान संभालने के बाद ठाकरे ने अयोध्या की यात्रा के साथ ही पंढरपुर में विठ्ठल रुक्मिणी मंदिर की यात्रा और पंढरपुर  में ही आषाढ़ी एकादशी विठ्ठल रुक्मिणी मंदिर में आषाढ़ी एकादशी के दिन पूजा की थी.

“गवर्नर उन विशेष शब्दों के चय से बच सकते थे”
ठाकरे को “हिंदुत्व का मजबूत समर्थक” बताते हुए, राज्यपाल ने अपने व्यंग्यात्मक पत्र में लिखा था कि उन्हें आश्चर्य हो रहा है कि क्या सीएम को “पूजा के स्थानों के फिर से खोले जाने के कदम को स्थगित रखने के लिए कोई दैवीय आदेश मिल रहा है.” या फिर आप खुद को ‘धर्मनिरपेक्ष’ बना चुके हैं. एक शब्द जिससे आप नफरत करते थे?”यह पूछे जाने पर कि पार्टी ने कोश्यारी की टिप्पणी को किस तरह देखा, शाह ने पुष्टि की कि उन्होंने पत्र पढ़ा है. शाह ने कहा, “उन्होंने एक चलताऊ संदर्भ दिया है, मगर मुझे भी लगता है कि शब्दों का चयन उन्होंने टाला होता है तो अच्छा रहता. लेकिन मेरा मानना ​​है कि वह (गवर्नर) उन विशेष शब्दों के चयन से बच सकते थे.”

महाराष्ट्र सरकार के मंदिर न खोलने के फैसले के बाद गवर्नर ने लिखा था पत्र
ठाकरे के संबोधन के जवाब में कोश्यारी ने यह पत्र लिखा था, जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा था कि राज्य सरकार ने कोरोना वायरस के खतरे के बीच मंदिरों को नहीं खोलने का फैसला किया है.

उनके शब्दों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए ठाकरे ने एक दिन बाद कोश्यारी को जवाब दिया था. उन्होंने कहा कि उन्हें किसी से भी हिंदुत्व का पाठ सीखने की आवश्यकता नहीं है.

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