पैरा-स्वीमर सतेंद्र सिंह लोहिया को मिल चुके हैं राष्‍ट्रपति, उपराष्‍ट्रपति और प्रधानमंत्री से पुरस्‍कार

भोपाल । वह नाविक क्‍या जो तूफानों से नौका पार लगा न सके, सच्‍चे नाविक की तरह वह इंसान ही सफल है, जिसने अपने जीवन में सबसे बड़ी चुनौती शारीरिक अक्षमता को कभी अपने लिए बोझ नहीं बनने दिया बल्‍कि उसकी यही अक्षमता उसके लिए वरदान साबित हो रही है। मध्य प्रदेश के पैरा-स्वीमर दिव्‍यांग सतेन्‍द्र सिंह लाहिया भी ऐसे ही जीवन के खेबनहार हैं जिन्‍हें प्रकृति की ओर से भले ही शारीरिक कमी मिली होगी लेकिन अपनी अदम्‍य इच्‍छाशक्‍ति से इन्‍होंने कई गुना अधिक अपनी क्षमताएं बढ़ाते हुए अपने लिए एक अलग ही सम्‍मानजनक मुकाम पाया है, जिसके लिए कई लोग तरसते रह जाते हैं।

सतेन्‍द्र को मिले राष्‍ट्रपति, उपराष्‍ट्रपति और प्रधानमंत्री से पुरस्‍कार
ग्वालियर के दिव्यांग इस पैरास्वीमर ने अपनी शारीरिक कमजोरी को ताकत बनाते हुए एशिया का सबसे पहला दिव्यांग पैरा स्वीमर होने का खिताब अपने नाम किया है । दोनों पैरों से दिव्यांग सत्येंद्र स्विमिंग में इतने माहीर हैं कि खतरनाक समुद्री लहरें भी उन्हें डगमगा नहीं पाईं। वास्‍तव में सतेन्‍द्र के सपने बड़े हैं, वे अपनी काबीलियत के बल 07 राष्‍ट्रीय और 03 अंतरराष्‍ट्रीय व अन्‍य 25 से अधिक महत्‍व के पदक अपने नाम कर चुके हैं। यह उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि राष्‍ट्र‍पति, उपराष्‍ट्रपति प्रधानमंत्री और मुख्‍यमंत्री तक से वे सम्‍मान पा चुके हैं और पीएम मोदी उन्‍हें न केवल दिव्‍यांगों के लिए बल्‍कि सभी के जीवन के लिए भी उत्‍साहित प्रेरणा के रूप में देखते हैं।

आज उनकी मेहनत प्रदेश व देश के उन तमाम खिलाड़ियों एवं अन्‍य के लिए भी प्रेरणा है जो कभी दिव्‍यांगता को अपने लिए बोझ समझते थे। हिन्‍दुस्‍थान समाचार से बातचीत में मध्य प्रदेश का नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोशन करने वाले दिव्यांग तैराक सतेंद्र सिंह लोहिया ने बताया कि शुरूआत बहुत ही मुश्‍किल भरी थी, कदम-कदम पर चुनौतियां थीं, अच्‍छा खेलने के बाद भी कोई स्पोन्सर नहीं मिलता था। पैसे के अभाव में प्राइवेट पढ़ाई और अपने खेल के जुनून को पूरा करने के लिए प्रतिदिन कई किलोमीटर की यात्रा जैसे शुरूआती दौर के वो संघर्ष हैं, जिन्‍होंने कई बार मुझे तोड़ने का प्रयास किया लेकिन हर बार मेरे मन-मतिष्‍क से यही आवाज आती थी, ”रुकना नहीं, थकना नहीं डटे रहना-डटे रहना यही संकल्‍प जीवन है” दरअसल, इसी सोच ने हर बार विपरीत से विपरीत परिस्‍थितियों में कभी मुझे टूटने नहीं दिया।

सभी दिव्‍यांग अपनी विशेषता को जानकर उस पर फोकस करें
तैराक सतेंद्र सिंह लोहिया को तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक सम्मान 2020 मिला है । पहली बार ये सम्मान किसी दिव्यांग को दिया गया है। सतेंद्र कहते हैं कि भिंड जिले के अपने गांव की नदी में तैरते समय मैंने कभी नहीं सोचा था, इस मुकाम तक पहुंच जाऊंगा। कैटलीना चैनल पार कर लिया और अब राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार, जीवन अद्भुत लगता है । उन्‍होंने हिस से कहा कि मैंने अपनी दिक्कतों को ही अपनी ताकत बना लिया है। दिव्यांगों को सहानुभूति की नहीं, सहयोग और सम्मान की जरूरत होती है। हर दिव्‍यांग के लिए मेरा यही संदेश है कि वे अपने शरीर की कोई कमी को अक्षमता नहीं समझे, बल्‍कि सोचे कि उसे प्रकृति ने क्‍या विशेष दिया है, अपने विशेष पर फोकस करे, वह जरूर अपने जीवन में सफल होगा।

उन्‍होंने पिछले साल ही अमेरिका में 42 किमी का कैटलीना चैनल 11:34 घंटे में तैरकर पार किया था और वे इसे पार करनेवाले पहले एशियाई दिव्यांग तैराक बने थे। सत्येंद्र सिंह का कहना है कि कैटलीना चैनल पार करना बेहद मुश्किल है। चैनल में पानी का तापमान लगभग 12 डिग्री होने के साथ ही शार्क मछलियों के हमले का खतरा भी बना रहता है। इसमें गहराई का भी अंदाज नहीं लगता । दिन में तेज चलने वाली हवाओं से बचने के लिये यह चैनल रात में पार किया, जो एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन यदि साहस बना रहे तो कोई भी मुकाम मुश्‍किल नहीं लगता ।

मप्र के छोटे से गांव की वेसली नदी में सीखी तैराकी
भिंड जिले के गाता गांव के रहने वाले सत्येंद्र ने भिंड जिले में अपने गांव की वेसली नदी में तैराकी सीखी। वह दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। ग्वालियर में सत्येंद्र ने तैराकी की तकनीक सीखी और फिर इसे अपना हुनर बना लिया। सतेंद्र के पिता गयाराम लोहिया वर्तमान में ग्वालियर के मुथूट फायनेंस में सिक्यूरिटी गार्ड हैं। श्री लोहिया इंदौर में वाणिज्यिक कर विभाग में कार्यरत हैं। विश्व दिव्यांग दिवस पर उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू द्वारा सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग खिलाड़ी नेशनल अवार्ड से सम्मानित पैरा-स्वीमर सतेन्द्र सिंह को मध्यप्रदेश के सर्वोच्च खेल अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है।

श्री लोहिया ने ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में ओलम्पिक स्वीमिंग एनएसडब्ल्यू-2017 स्टेट ओपन चैम्पियनशिप में भारत के लिये स्वर्ण-पदक जीता। उन्होंने मई-2017 में ओपन वाटर सी-स्वीमिंग फीट ऑफ 33 किलोमीटर को पार किया। 24 जून, 2018 को इंग्लिश चैनल स्वीमिंग में पैरा-स्वीमिंग रिले टीम के माध्यम से कीर्तिमान स्थापित किया और 18 अगस्त, 2019 को कैटलीना इंग्लिश चैनल पार कर इतिहास रचा। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सतेन्द्र ने मध्यप्रदेश के लिये 12 रजत एवं 8 काँस्य-पदक हासिल किये हैं।

प्रधानमंत्री मोदी पर कर चुके हैं उनके लिए ट्वीट
सतेन्‍द्र से मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके लिए ट्वीट कर चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि ‘मैंने सतेन्द्र सिंह लोहिया से मुलाकात की। वे एक बेहतरीन पैरा-तैराक हैं। उन्होंने अब तक कई पुरस्कार जीते हैं। उनकी जीवन-यात्रा कई लोगों को प्रेरित कर सकती है। कुछ समय पहले वे कैटलीना चैनल को तैरकर पार गये।”

उन्‍हें लेकर आयुक्त नि:शक्तजन कल्याण संदीप रजक का कहना है कि देश में किसी दिव्यांग को साहसिक खेलों का प्रतिष्ठित अवार्ड मिला है तो सतेन्‍द्र सिंह हैं । वे आज हर दिव्‍यांग के लिए एक बहुत बड़े प्रेरणा-स्रोत हैं । हमारा विभाग हमेशा उसके कार्य में सहयोग के लिए साथ है। वर्तमान में सच यही है कि 70 प्रतिशत दिव्यांग की कैटेगरी में आने वाले दोनों पैरों से दिव्यांग सत्येंद्र सिंह ने अपनी कमजोरी को ही हुनर बनाकर दिखाया है, यही कारण है कि सीएम शिवराज सिंह चौहान से लेकर पीएम नरेंद्र मोदी भी सम्मानित कर चुके हैं ।(हि.स.)

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