पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई सीआरपीएफ की पासिंग आउट सेरेमनी

नई दिल्ली

पैरामिलिट्री फोर्स के 42 ट्रेनी अफसरों ने मास्क और दस्ताने पहनकर ली देश सेवा की शपथ

देश की सबसे बड़ी पैरामिलिट्री फोर्स सीआरपीएफ ने कोविड-19 प्रकोप के बीच शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वेबिनार) के जरिये आयोजित पासिंग आउट परेड के बाद 42 नए प्रशिक्षु अधिकारियों को बल में शामिल कर लिया। केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने नॉर्थ ब्लॉक और सीआरपीएफ प्रमुख एपी माहेश्वरी ने लोधी रोड स्थित अपने-अपने कार्यालयों से युवा अधिकारियों को संबोधित किया जो कि गुड़गांव के कादरपुर गांव में सीआरपीएफ अधिकारियों के प्रशिक्षण शिविर के सभागार में बैठे थे। सीआरपीएफ के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब उसका पासिंग आउट कार्यक्रम परंपरागत तरीके के बजाय, वेब के आधारित कार्यक्रम के जरिये आयोजित किया गया। इससे पहले हर बार यह कार्यक्रम खुले मैदान में आयोजित किया जाता रहा है।

कार्यक्रम के दौरान जिन 42 प्रशिक्षु अधिकारियों को सीआरपीएफ में शामिल किया गया, उनमें चार महिलाएं शामिल हैं। सभी ने चेहरे पर मास्क और हाथों में दस्ताने पहन रखे थे। अधिकारियों ने देश सेवा की शपथ ली, जिसके बाद उन्हें सहायक कमांडेट के पद पर तैनात कर दिया गया, जो कि सीआरपीएफ या केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल में अधिकारियों का पहला पद होता है और वे लगभग 100 कर्मियों की एक कंपनी की कमान संभालते हैं।

कार्यक्रम के दौरान, हर बार होने वाली परेड और अफसरों की सलामी भी नहीं हुई। बल के महानिदेशक एपी माहेश्वरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही 42 डायरेक्टली अपॉइंटेड गजटेड ऑफिसर्स (डीएजीओएस) को देशसेवा की शपथ दिलाई। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्‌डी भी समारोह में कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही जुड़े। उन्होंने ट्रेनी अफसरों को गृह मंत्री अमित शाह का संदेश पढ़कर सुनाया।

यह तस्वीर सीआरपीएफ ट्रेनिंग अकादमी कादरपुर की है। यहां 42 अफसरों की ट्रेनिंग के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उन्हें देशसेवा की शपथ दिलाई गई। इनसेट- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का संदेश अफसरों को पढ़कर सुनाया गया।

कार्यक्रम से पहले पूरे हॉल को किया गया सैनिटाइज

कार्यक्रम शुरू होने से पहले पूरे हॉल को सैनिटाइज किया गया। ट्रेनी अफसरों और समारोह में शामिल होने वाले अन्य अफसरों को सोशल डिस्टेंसिंग के हिसाब से दूर-दूर बैठाया गया। माहेश्वरी के संबोधन के बाद फोर्स की रस्म, जिसे अंतिम पग यानी ‘पीलिंग ऑफ’ कहा जाता है, वह भी ऑडिटोरियम की सीढ़ियों पर ही पूरी हुई। पूरे कार्यक्रम का लाइव प्रसारण यूट्यूब पर हुआ। इसका लिंक प्रत्येक ट्रेनी अफसरों के परिजन से भी शेयर किया गया था, ताकि वे भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सकें।

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