एनआरसी वेबसाइट से अचानक गायब हुआ डाटा, सूची से बाहर किए गए लोगों के बीच दहशत

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। एक तरफ देश के कई राज्यों में नेशनल रजिस्टर सिटीजन (एनआरसी) को लेकर बवाल मचा हुआ तो वहीं असम में एनआरसी का ऑनलाइन डाटा ही गायब हो गया है। अचानक डाटा गायब होने से वेबसाइट की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवब्रत सायकिया ने मंगलवार को एक चिट्ठी लिखकर इस घटना की जानकारी दी।

31 अगस्त को प्रकाशित अंतिम नागरिकता रोल में शामिल या बाहर किए गए सभी आवेदकों के विवरण सहित असम का अद्यतन राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) डेटा राष्ट्रीय पंजीकरण के राज्य समन्वयक की आधिकारिक वेबसाइट से गायब हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर 31 अगस्त 2019 में प्रकाशन होने के बाद आधिकारिक वेबसाइट www.nrcassam.nic.in पर वास्तविक भारतीय नागरिकों के नाम शामिल और बाहर किए जाने का पूरा विवरण अपलोड किया गया था।

देवब्रत ने अपनी चिट्ठी में रजिस्ट्रार जनरल और सेन्सस कमिश्नर को रहस्मय तरीके से अचानक डाटा के गायब होने का मुद्दा उठाया है। सायकिया ने लिखा, “पीड़ितों के अपील की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही डाटा अचानक गायब हो गया। इसलिए इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि डाटा को बुरे इरादे से गायब किया गया है। ऐसा करना सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का खुला उल्लंघन है।”

अभी कुछ दिनों पहले असम में भारत सरकार और बोडो समुदाय के बीच समझौता हुआ था। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात फरवरी को ट्वीट कर कहा था, “आज जब बोडो क्षेत्र में, नई उम्मीदों, नए सपनों, नए हौसले का संचार हुआ है, तो आप सभी की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। मुझे पूरा विश्वास है कि बोडो टेरिटोरियल काउंसिल अब यहां के हर समाज को साथ लेकर, विकास का एक नया मॉडल विकसित करेगी।”

अब डेटा हटाए जाने से लोगों में, खासतौर पर सूची से बाहर किए गए लोगों के बीच दहशत पैदा कर दी है क्योंकि उनके नाम खारिज किए जाने का प्रमाणपत्र उन्हें जारी किया जाना अभी बाकी है। कुछ लोगों का मानना है कि बीजेपी ने उनको छला है। सभी डेटा आईटी कंपनी विप्रो के साथ अनुबंध के नवीनीकरण नहीं होने के चलते अपनी आधिकारिक वेबसाइट से ऑफलाइन हो गए हैं। इस पर विपक्षी कांग्रेस ने इसे एक ‘दुर्भावनापूर्ण कार्य’ करार दिया है।

पिछले साल अक्तूबर महीने में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लोगों के डाटा को ऑनलाइन किया गया था। हालांकि डाटा कैसे गायब हुआ अभी भी ये रहस्य बना हुआ है। एनआरसी से जुड़े अधिकारी ने बताया कि डाटा को क्लाउड स्टोरेज किया गया था। मगर क्लाउड स्टोरेज का पीरियड समाप्त हो जाने पर सेवा प्रदाता कंपनी विप्रो से रिन्युअल नहीं कराया गया।

मामला सामने आने के बाद गृह मंत्रालय ने बयान जारी किया है। उन्होंने एनआरसी डाटा को सुरक्षित बताया है। उनका कहना है कि क्लाउड पर तकनीकी समस्या के चलते डाटा दिखाई नहीं दे रहा है और जल्द ही तकनीकी समस्या को दूर कर लिया जाएगा।

नेशनल रजिस्टर में ऐसे लोगों की जानकारी रखी गयी है जिनका नागरिक होने का सबूत है। साथ ही ऐसे लोगों का भी डाटा है जिनको नागरिकता के दायरे से बाहर या संदिग्ध कर दिया गया है। राज्य की कुल आबादी 3 करोड़ 30 लाख 27 हजार 661 में 3 करोड़ 11 लाख 21 हजार 4 लोगों को शामिल किया गया। जब एनआरसी का अंतिम ड्राफ्ट तैयार हुआ तो उसमें 19 लाख 6 हजार 657 लोगों को बाहर कर दिया गया।

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