नाक के नीचे से निकली दिल्ली

नई दिल्ली

आप को मिली प्रचंड जीत, दिल्ली में बैठे भाजपा के सभी सांसद, मंत्री और नेताओं के नाक के नीचे से दिल्ली निकल गई

दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पाट को लगातार तीसरी बार जीत मिली है। भाजपा लाख कोशिशों के बावजूद दो अंकों के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई। वहीं कांग्रेस इस बार भी अपना खाता नहीं खोल पाई। उसके अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई।

दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी (आप) का जादू चल गया है। अरविंद केजरीवाल का लगातार तीसरी बार दिल्ली के सीएम बनना तय हो गया है। दिल्ली की जनता ने शाहीन बाग और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के मुद्दे को नकारते हुए स्थानीय मुद्दे के आधार पर वोट दिया। पिछले चुनावों की तरह इस बार भी कांग्रेस इन चुनावों में खाता नहीं खोल पाई। वहीं, भाजपा ने अपनी टैली मजबूत की है।

आम आदमी पार्टी को इस बार भी 54 प्रतिशत के आसपास वोट मिलते दिख रहे हैं। हालांकि इस बार उसे 5 सीटों का नुकसान हो रहा है। आप ने 2015 में 54% वोटों के साथ 67 सीटों पर धमाकेदार जीत दर्ज की थी। इसमें मुस्लिम वोटरों के कांग्रेस को छोड़कर आप में साथ लामबंद होना एक बड़ी वजह थी। इस बार के चुनाव के नतीजे भी यही ट्रेंड दिखा रहे हैं।

भाजपा के वोट और सीटें बढ़ी पर…

भाजपा के लिए इन चुनावों में संतोष करने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि उसके वोट और सीटें बढ़ी हैं। 2013 में बीजेपी ने 68 सीटों पर कैंडिडेट उतारे थे और उसे 31 सीटों पर जीती मिली थी। तब उसे 33.07% वोट मिले थे। 2015 के चुनाव में भी बीजेपी को 32.1 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन सीटें तीन ही हासिल हुईं। इस बार लगभग 08 सीटें मिलती दिख रही हैं। वहीं, वोट प्रतिशत की बात करें तो 2015 में करीब 32 प्रतिशत वोट हासिल करने वाली पार्टी को इस बार 7% की बढ़त के साथ 39% के करीब वोट मिलते दिख रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस के वोट भाजपा को शिफ्ट हुए हैं?

कांग्रेस की सबसे बड़ी हार

2013 में कांग्रेस को 70 में से 8 सीटों पर जीत मिली थी और 24.55% वोट मिले थे। लेकिन, 2015 में कांग्रेस की राजनीतिक किस्मत बिल्कुल बदल गई। उसका वोट प्रतिशत घटकर 9.8 प्रतिशत रह गया और जीत का खाता भी नहीं खुल पाया। यानी, 2 साल के अंदर दिल्ली के 15 प्रतिशत मतदाताओं ने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया। 2013 चुनाव में आप को 29.49 प्रतिशत वोट मिले थे और उसने 28 सीटें जीत ली थीं। लेकिन, दो साल बाद ही 2015 में उसका वोट प्रतिशत बढ़कर 54.3% पर पहुंच गया और उसे 70 में से 67 सीटों की बंपर जीत मिली।

केजरीवाल के सभी मंत्री जीते

कई राज्यों में हाल में हुए विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो देखेंगे कि भले पाट की सत्ता में वापसी हो गई हो, लेकिन उसके बड़े बड़े मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा है। यहां पर सभी मंत्री चुनाव जीत गए हैं। मनीष सिसोदिया, गोपाल राय, सौरभ भारद्वाज, सत्येंद्र जैन, इमरान हुसैन, राजेंद्र पाल गौतम, कैलाश गहलोत चुनाव जीत गए हैं।

आतंकी कहने वाले नेताओं की नहीं चली

2015 के विधानसभा चुनाव में आप के टिकट पर विधायक और फिर मंत्री बनने वाले कपिल मिश्रा इस बार भाजपा में आ गए थे। मॉडल टाउन विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर भाग्य आजमाने वाले कपिल मिश्रा ने अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत ही आतंकवादी और पाकिस्तान से शुरू की थी। इसी तरह पश्चिमी दिल्ली से भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा पूरे चुनाव प्रचार में छाए रहे। पूरे प्रचार के दौरान प्रवेश बिरयानी, शाहीन बाग, बांग्लादेश, पाकिस्तान, आतंकवादी जैसे शब्दों का प्रयोग करते रहे।

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