एलओसी के करीब महिला सैनिकों की तैनाती

तंगधार

रायफल वूमेन को सौंपी गई जिम्मेदारी

करीब 10 हज़ार फ़िट की ऊंचाई और एलओसी से महज़ 10-12 किलोमीटर की दूरी पर पहली बार महिला सैनिकों की तैनाती की गई है। ये रायफल वूमेन उत्तर-पूर्व में म्यांमार की सीमा पर तो ऑपरेशन को अंजाम दे चुकी हैं, अब ये एलओसी के पास अपने महारथ दिखाएगी।

दरअसल तंगधार में साधना पास पर नारकोटिक्स (ड्रग्स), नकली करेंसी और हथियारों की तलाशी का काम अब इन्हीं राइफल वूमेन के हाथों में है। ये इलाक़ा पीओके के बेहद क़रीब है जहां से पाकिस्तान, आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के साथ-साथ नारकोटिक्स भेजने की कोशिश करता रहता है। जिससे घाटी में आतंकियों को फ़ंडिंग मुहैया कराई जाती है।
इस जगह पर ड्यूटी के लिए ये रायफल वूमेन पूरी तरह से मुस्तैद हैं। एक समाचार चैनल से बातचीत के दौरान रायफल वूमेन ने बताया, “पहले तो हमे 44 हफ़्तों की ट्रेनिंग दी जाती है ताकि हम नार्थ-ईस्ट के साथ-साथ देश के किसी भी कोने में ड्यूटी कर सकते है लेकिन इतनी उंचाई के लिए अलग से ट्रेनिंग दी गई है।

पहले महिला पुलिस हुआ करती थी तैनात

इससे पहले इस साधना पास के इस पोस्ट पर जम्मू-कश्मीर की महिला पुलिस तैनात हुआ करती थी, जिन्हें अब असम राइफल्स की राइफल वूमेन से बदल दिया गया है। सेना ने इसके लिए महिला राइफल वूमेन की एक प्लाटून को लगाया है। इस प्लाटून की 9 राइफल वूमेन सेना की एक महिला कैप्टन के नेतृत्व में इस पोस्ट से गुजरने वाली हर उस गाड़ी की तलाशी का काम करती हैं, जिसमें कोई भी महिला यात्री होती है। इन रायफल वूमेन की टुकड़ी को लीड करने वाली महिला अफसर कैप्टन गुरसिमरन कौर ने बताया कि उनकी टीम बहुत अच्छे से अपनी ड्यूटी को निभा रही है। क्योंकि इनकी ट्रेनिंग भी बिलकुल सेना के किसी जवान की तरह होती है।

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