मध्य प्रदेश में डीजीपी की लड़ाई अब सोशल मीडिया पर

प्रजातंत्र ब्यूरो | भोपाल

डीजीपी पद के लिए आधा दर्जन अफसर कर रहे लॉबिंग, डीजी रैंक के अफसर ने सोशल मीडिया पर खोला मोर्चा

संभवतया मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली बार पुलिस महानिदेशक के पद तक पहुंचने की लड़ाई अब खासो-आम तक पहुंच गई है। मौजूदा डीजीपी वीके सिंह से सरकार की नाराजगी और भारतीय पुलिस सेवा 1985 बैच के राजेंद्र कुमार को डीजीपी बनाए जाने की अटकलों के बीच 1984 बैच के डीजी रैंक के अफसर मैथिलीशरण गुप्त ने सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है। इस बीच खबरें हैं कि सरकार हनी ट्रैप मामले की एसआईटी के मुखिया राजेंद्र कुमार को नई जिम्मेदारी देने के पहले इंदौर हाईकोर्ट में एक अर्जी दे सकती है। इसमें एसआईटी चीफ बदलने का जिक्र होगा।

राजगढ़ कलेक्टर निधि निवेदिता द्वारा एक पुलिसकर्मी को थप्पड़ मारे जाने की जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय से होते हुए गृह विभाग तक पहुंचने के बाद डीजीपी वीके सिंह से सरकार के मुखिया कमलनाथ नाराज हैं। एसआईटी बनाने के मामले में भी उनकी नाराजगी सामने आई थी। मौजूदा डीजीपी वीके सिंह 1984 बैच के अफसर हैं। मध्यप्रदेश में इस बैच के दो और अफसर संजय चौधरी और मैथिलीशरण गुप्त हैं। तीसरे अफसर विवेक जोहरी अभी सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक हैं। इन दोनों के अलावा 1985 बैच के अशोक दोहरे भी वरिष्ठता में आगे हैं।

1986 बैच के अधिकांश अफसर 6 महीने के अंदर रिटायर हो रहे हैं। इस कारण 1986 बैच के अफसरों का दावा कमजोर हो गया है। जिनमें केएन तिवारी, अनिल कुमार, डॉ. शैलेंद्र श्रीवास्तव आदि के नाम है। इस बैच के पुरुषोत्तम शर्मा जरूर अगले 3 साल तक सेवा में रहेंगे। इनके अलावा 1987 बैच के अफसर और डीजी विशेष सशस्त्र बल विजय यादव का नाम भी डीजीपी के लिए गंभीरता से लिया जा रहा है। इंटेलिजेंस से लेकर फील्ड तक में यादव अपने सीनियर अफसरों से ज्यादा बेहतर ट्रैक रिकॉर्ड रखते हैं।

डीजी गुप्त ने वॉट्सएप पर लिखा…

मैं खुद को पीड़ित किया व्यथित व्यक्ति के रूप में प्रोजेक्ट नहीं करना चाहता, सरकार को खुद ही महसूस करना चाहिए कि मैं भी राज्य पुलिसिंग को बदलने की क्षमता रखता हूं, अगर सरकार इसे पहचानने में असफल हो रही है तो भी मैं नाराज नहीं हूं। गुप्त ने लिखा है कि सरकार का मेरी काबिलियत को ना पहचानना इस प्रदेश की जनता के साथ अन्याय होगा। प्रदेश की पुलिसिंग में वर्तमान परिस्थिति की जो मांग है उसके अनुरूप मेरा चयन बहुत जरूरी है। मेरे अंदर हर वह गुण मौजूद है जो पुलिस की गिरती साख को मजबूत कर सकता है। प्रदेश के गणमान्य नागरिक और पत्रकारों को यह बात सरकार को बतानी और समझाना चाहिए कि टाइमपास के लिए किसी को डीजी ना बनाएं। मुझ में काबिलियत है डीजी बनने की। मैं अपने विचार प्रकट कर खुद को प्रताड़ित या शोषित नहीं दर्शाना चाहता। मैं जहां हूं जो कुछ हूं वहां भी खुश हूं क्योंकि मैं अपनी काबिलियत से यहां पहुंचा हूं, किसी की चापलूसी से नहीं।गुप्त का यहां मैसेज रविवार को ब्यूरोक्रेसी में दिनभर वायरल होता रहा।

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