दिग्विजय सिंह ने दी एनआरसी की नई परिभाषा

विभव देव शुक्ला

एनआरसी और सीएए को लेकर शुरू हुआ विरोध अभी तक रुका नहीं है, चाहे सड़कों पर प्रदर्शन हो या मुद्दे को लेकर होने वाली बहस जितना कुछ हो सकता है सब जारी है। लेकिन दूसरी तरफ सरकार का मत भी इस मामले पर बेहद साफ है। गृह मंत्री अमित शाह ने कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था सरकार सीएए पर कदम पीछे नहीं लेने वाली है। लेकिन हर क्रिया की एक प्रतिक्रिया होती है, नतीजतन मुद्दे पर कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह का बयान आया है।

बांटने वाला एजेंडा
कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने सरकार से बेरोज़गारी के मुद्दे पर सवाल करते हुए एनआरसी को निशाना बनाया है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री को नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिज़न बनाने की जगह नेशनल रजिस्टर ऑफ एजुकेटेड अनइम्प्लोयड इंडियन सिटिज़न बनवाना चाहिए। इतना ही नहीं दिग्विजय सिंह का कहना था कि जहां एक तरफ एनआरसी का एजेंडा बांटने वाला है वहीं नेशनल रजिस्टर ऑफ एजुकेटेड अनइम्प्लोयड इंडियन सिटिज़न का एजेंडा लोगों का जोड़ने का होगा।

एजुकेटेड अनइम्प्लोयड इंडियन सिटिज़न
अपने बयान में दिग्विजय सिंह ने कहा मेरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक सुझाव है। एनआरसी, जिसकी वजह से देश में सामाजिक अस्थिरता का माहौल बना है उसका नाम बदल कर नेशनल रजिस्टर ऑफ एजुकेटेड अनइम्प्लोयड इंडियन सिटिज़न कर देना चाहिए। यह असल मायनों देश को जोड़ने वाला एजेंडा होगा लेकिन वह ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि उनका एजेंडा बांटने वाला है।
पिछले काफी समय से कांग्रेस ने भाजपा की बेरोज़गारी के मुद्दे पर काफी आलोचना की है। इसके अलावा एनआरसी, देश आर्थिक स्थिति, सीएए, एनपीआर और एनआरसी जैसे मुद्दों पर कांग्रेस का रवैया भाजपा के लिए बेहद आलोचनात्मक रहा है। कांग्रेस पार्टी के कई दिग्गज नेता शुरू से मोदी सरकार के इन फैसलों का विरोध करते रहे हैं।

19 लाख से ज़्यादा लोग सूची से बाहर
हाल ही में असम राज्य की एनआरसी लिस्ट तैयार की गई थी। जिसमें राज्य के लगभग 19 लाख लोग सूची से बाहर थे, वहीं इन लोगों में अधिकांश लोग हिन्दू समुदाय से थे। एनआरसी देश के मूल नागरिकों का रजिस्टर होगा, जिसमें देश के हर नागरिक को दस्तावेज़ों के साथ शामिल किया जाएगा। नागरिकता अधिनियम 1955 के आधार पर नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिज़न बनाना अनिवार्य है। एनआरसी का मूल उद्देश्य ऐसे लोगों की ओहचान करना है जो देश में अवैध रूप से रह रहे हैं। यह फिलहाल असम में लागू हो चुका है।

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