कोरोना का खुलासा करने वाले डॉक्टर का होगा सम्मान

वाॅशिंगटन

अमेरिका में डॉक्टर वेनलियांग के नाम पर होगा चीनी दूतावास की सड़क का नाम

कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर चीन और अमेरिका के बीच टकराव जारी है। अमेरिका और उसके समर्थक देशों का आरोप है कि यह वायरस वुहान की एक लैबोरेट्री में तैयार किया गया और एक साजिश के तहत इसे फैलाया गया। हालांकि चीन ने इससे इनकार किया है। इस विवाद के बीच, अमेरिका एक और नया कदम उठा सकता है। अमेरिकी सीनेट के कई सदस्यों ने यह प्रस्ताव रखा है कि वाशिंगटन शहर की जिस स्ट्रीट पर चीन का दूतावास है, उसका नाम बदलकर उस व्हिसलब्लोअर डॉक्टर के नाम पर रख दिया जाए, जिसने दुनिया को कोरोना महामारी की जानकारी दी।

चीनी डॉक्टर ली वेनलियांग ने ही चीन के वुहान शहर में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की सबसे पहले पहचान की थी। उन्होंने अपने साथी डॉक्टरों को बताया था कि उन्होंने कुछ मरीज़ों में सार्स जैसी बीमारी के लक्षण देखे हैं। हालांकि डॉक्टर वेनलियांग की चेतावनी को अफवाह बताते हुए चीन के स्थानीय प्रशासन ने उन्हें फ़र्ज़ी बयानबाज़ी ना करने की हिदायत दी थी। चीनी सरकार ने न सिर्फ उन्हें डराया -धमकाया बल्कि कानूनी कार्रवाई की धमकी भी दी थी। बाद में कोविड-19 की ही वजह से डॉक्टर वेनलियांग की मौत हो गई थी जिसे लेकर चीनी सोशल मीडिया पर लोगों में काफ़ी आक्रोश भी देखने को मिला था।

वाशिंगटन की जिस स्ट्रीट पर चीन का दूतावास स्थित है, उसे इंटरनेशनल प्लेस के नाम से जाना जाता है और इसी का नाम बदले जाने की संभावना है। अगर ऐसा होता है तो चीन इससे भड़क सकता है क्योंकि वहां की कम्युनिस्ट सरकार डॉक्टर वेनलियांग को कोई भी सम्मान देने के खिलाफ है। बता दें कि साल 2014 में भी अमेरिकी सीनेटरों ने कोशिश की थी कि इस स्ट्रीट का नाम चीन के एक नोबेल पुरस्कार विजेता के नाम पर रखा जाए।

आठ व्हिसलब्लोअर में से एक थे वेनलियांग

डॉक्टर वेनलियांग चीन में कोरोना वायरस के संक्रमण के बारे में चेतावनी देने वाले आठ व्हिसलब्लोअर में से एक थे। उनकी मौत कोरोना संक्रमण की वजह से मार्च में हुई थी। वेनलियांग ने महामारी की जानकारी जब दी थी, तब चीन की पुलिस ने उनका काफी उत्पीड़न किया था। 34 वर्षीय वेनलियांग ने अन्य डॉक्टरों को महामारी के बारे में चेतावनी देने की कोशिश की थी।

वेनलियांग ने साथियों को चीनी मैसेजिंग ऐप वीचैट पर बताया था कि स्थानीय सी फूड बाजार से आए सात मरीजों का सार्स जैसे संक्रमण का इलाज किया जा रहा है और उन्हें अस्पताल के पृथक वार्ड में रखा गया है।

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