इंदौर से भागा डॉ. पंजवानी का कम्पाउंडर निकला पॉजिटिव

विनोद शर्मा | इंदौर

इंदौर से दोस्तों सहित भागा शख्स कई रिश्तेदारों के घर रुकते हुए पहुंचा अपने गांव, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़ सहित कई जिलों में संक्रमण का डर

इंदौर में कोरोना के संक्रमण से जान गंवा चुके डॉ. शत्रुघ्न पंजवानी के कम्पाउंडर संतोष शुक्ला और उसके आठ दोस्तों ने बुंदेलखंड में संक्रमण का खतरा बढ़ा दिया है। संतोष और उसके दोस्त इंदौर से लॉकडाउन के दौरान भाग गए थे। संतोष ने इंदौर से सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, ललितपुर(यूपी) तक इस दौरान यात्रा की। कुछ पैदल, कुछ ट्रक और छोटे वाहनों से लिफ्ट लेकर ये आठों अपने-अपने घर पहुंचे। रास्ते में आठों अपने-अपने रिश्तेदारों के यहां भी रुकते रहे। टीकमगढ़ पहुंचने पर संतोष की तबियत बिगड़ी, और वो पॉजिटिव निकला। रास्ते में वो जहां-जहां रुका था, उन जिलों के कलेक्टरों को पूरी सूची भेज दी गई है। इसके अलावा संतोष का फोटो लगाकर इलाके के लोग फेसबुक पर भी चला रहे हैं कि ये आदमी पॉजिटिव निकला है, जिस-जिस के संपर्क में आया हो, वो अपनी सूचना दें।

सूत्रों के अनुसार संतोष शुक्ला पत्नी और दो बच्चों के साथ 28 मार्च को इंदौर से टीकमगढ़ गया था। चूंकि शुक्ला इंदौर से आया था इसीलिए 30 मार्च को स्वास्थ्य विभाग ने होम क्वारंटाइन करते हुए घर पर नोटिस चिपका दिया। तबियत बिगड़ने पर 11 अप्रैल को सैंपल भोपाल भेजे। 14 अप्रैल को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। पत्नी-बच्चों को भी क्वारंटाइन करके सैंपल भोपाल भेज दिए हैं। जब शुक्ला से ट्रैवेल और कॉन्टेक्ट हिस्ट्री पूछी गई तो उसने बताया कि उसके साथ धरमपुरा (छतरपुर) के दो, महारौनी का एक और ललितपुर का एक दोस्त भी था। रास्ते में सागर, छतरपुर में रहने वाले रिश्तेदारों के यहां भी रुके। जो साथी वहां के रहने वाले थे, वहीं रह गए। मैं 28 से 10 अप्रैल तक गांव में घूमता रहा। कई दोस्तों से मिला जिनके नाम बता दिए हैं।

पत्नी-बच्चे भी संक्रमित!

सीएमएचओ डॉ. एमके प्रजापति ने बताया कि परिवार में चार लोगों के सैंपल लिए गए थे। एक रिपोर्ट पॉजिटिव आई। अन्य 4 सदस्यों की भी तबियत ठीक नहीं है। इनमें पत्नी और बच्चे भी शामिल हैं। उनके भी संक्रमित होने की आशंका है। उनके सैंपल फिर से लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं।

पैदल और लोिडंग वाहनों से गांव पहुंचा, 7 दिन तक लक्षण नहीं दिखे

पॉजिटिव निकले संतोष शुक्ला ने बताया कि वह दो-तीन साल से डॉ. पंजवानी के यहां नौकरी कर रहा था। काफी पैदल चलने और लोडिंग वाहनों की मदद से टुकड़ों-टुकड़ों में यात्रा की। हालांकि वाहनों के नंबर मुझे याद नहीं है। चूंकि हमंे बीमारी की आशंका नहीं थी इसीलिए रिश्तेदारों से भी मिलते-जुलते रहे। रिपार्ट आने के बाद पुलिस बल के साथ लमेरा पहुंचे स्वास्थ्य अधिकारियों ने शुक्ला को बल्देवगढ़ के कस्तूरबा गांधी छात्रावास में शिफ्ट कर दिया। उसके कॉन्टेक्ट में आए अन्य 34 को आइसोलेशन के लिए आदिवासी छात्रावास में रखा गया है।

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