साँझ के फूल

– जगदीश चतुर्वेदी
13 जनवरी 1933 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जन्म। सूर्यपुत्र, पूर्वराग, इतिहासहंता, नए मसीहा का जन्म, अंधेरे का आदमी आदि प्रमुख कृतियां। 14 सितम्बर 2015 को निधन।

 

किरमिची से फूल :
तुम्हारी साँवली छवि पर उतरता
सद्य:स्नाता साँझ का मोहक, मन्दिर प्रतिबिम्ब !

चाहता हूँ
एक पल को बाँध लूँ मैं (अंजुरियों में)
रूप का इतना घना सैलाब – कस लूँ बाहुओं में
अनछुआ यौवन !

दिन बहुत बीते तुम्हारे रूप का प्रतिबिम्ब केवल
पा सका हूँ ।

चाहता हूँ
साँझ के ये किरमिची से फूल अपनी देह में, रग में
कहीं भीतर जहाँ स्पर्श करती है तुम्हारी ये मदिर छवि
सहेजूँ रख लूँ !

मैं नहीं चाहता हूँ छोड़ना ये साँझ का सुख
ये तुम्हारा किरमिची-सा गात

चाहता हूँ एक युग तक बाँधना यह साँझ –
और उससे भी बहुत सुन्दर तुम्हारा रूप !

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