बेरूत धमाकों का असर, पीएम समेत पूरी सरकार का इस्तीफा

बेरूत

बड़ा निर्णय सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुआ हिंसक, बंदरगाह हादसे के बाद भारी आलोचना, भ्रष्टाचार और अयोग्यता के आरोपों के बीच सरकार का बड़ा फैसला

करीब एक हफ्ते पहले लेबनान की राजधानी बेरूत में हुए धमाकों ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। इस घटना को लेकर देश में इस कदर आक्रोश है कि पूरी सरकार ने ही इस्तीफा देने का फैसला कर लिया है। देश के प्रधानमंत्री हसन दिआब जल्द ही इसका ऐलान करने वाले हैं। 150 से ज्यादा लोगों की जान लेने वाले धमाके की जांच में धीरे-धीरे सरकारी महकमे की लापरवाही और सरकार की अयोग्यता को लेकर सवाल उठने लगे तो एक-एक कर मंत्रियों ने इस्तीफा देना शुरू कर दिया था।

देश में सरकार के खिलाफ आक्रामक प्रदर्शन चल रहे हैं जिन्होंने हिंसक रूप ले लिया है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के एक सूत्र ने यह जानकारी दी है कि सोमवार रात तक सरकार ‘सिर्फ केयरटेकर’ की भूमिका में आ जएगी। कैबिनेट के 3 मंत्री पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं और संसद के 7 सदस्यों ने भी पद छोड़ दिया है। देश के स्वास्थ्य मंत्री ने इस बारे में जानकारी दी है कि सभी मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है सोमवार को पीएम इस कदम का ऐलान करने वाले हैं। वह राष्ट्रपति को सबका इस्तीपा सौंपने वाले हैं।

जमीन पर हो गया विशाल गड्ढा

इस बंदरगाह पर अनाज भंडार करने वाली विशाल इमारत थी। वह पूरी तरह तो नहीं ढही है लेकिन उसका एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया है। तस्वीरों से पता चल रहा है कि उसके पास पहले मौजूद दो इमारतें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं और उनके नीचे की जमीन ही गायब हो गई है। यह जगह पानी से भरे विशाल क्रेटर की तरह दिख रही है। इसके पास लाइन से बनीं बाकी इमारतों को पहुंचा नुकसान भी साफ देखा जा सकता है। पूरी-की-पूरी इमारतें गायब हो गई हैं और सिर्फ ढांचे दिखाई दे रहे हैं। कुछ इमारतों के ढांचे भी नहीं बचे हैं। यहां तक कि एक तस्वीर में एक बड़ी बोट भी पलटी दिखाई दे रही है। बड़ी संख्या में इमारतों की छतें ही उड़ गई हैं।

आर्थिक संकट, कोरोना के बाद धमाके

लेबनान में पहले से ही आर्थिक संकट था जिसके बीच कोरोना वायरस भी कहर बरपा रहा था। वहीं, सरकार के खिलाफ लचर रवैये और भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे थे। राजधानी बेरूत में हुए धमाकों के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। जांच में यह बात सामने आ रही है कि कई साल से वह विस्फोटक केमिकल, अमोनियम नाइट्रेट, बंदरगाह पर पड़ा था और कई चेतावनी जारी किए जाने के बावजूद इसकी अनदेखी की गई।

पिछले साल आई थी सरकार

पिछले साल भारी जन आंदोलन के सरकार गिराने के बाद हसन की सरकार आई थी। इस सरकार में कई टेक्नोक्रैट शामिल हैं और बड़ी पार्टियों से लेकर ईरान का भी समर्थन हासिल है लेकिन एक साल के अंदर ही यह भी गिर गई है। लोगों ने बेरूत पोर्ट पर धमाकों से नाराज होकर प्रदर्शन किए थे।

100 से ज्यादा की मौत

धमाके से यहां कम से कम 150 लोगों की मौत और 4 हजार से ज्यादा घायल हैं। धमाका इतना भयानक था कि इसकी तुलना 1945 में हुए हिरोशिमा परमाणु हमले से की जा रही है। 200 किलोमीटर दूर तक इसका असर था और रास्ते में आने वाली इमारतों और गाड़ियों के कांच टूट गए।

धमाके से पैदा हुआ एक और संकट

कोरोना वायरस और आर्थिक संकट से जूझ रहे देश के लिए एक बड़ी समस्या यह है कि जिस विशाल इमारत में अनाज का भंडार था, वही तबाह हो गई है। इससे अब देश के पास एक महीने से भी कम का अनाज बचा है। इस बीच देश के इकॉनमी मंत्री का कहना है कि अभी संकट से निपटने भर का आटा मौजूद है। मंत्री का कहना है कि ब्रेड या आटे की दिक्कत नहीं है और कई जहाज लेबनान के लिए ये लेकर आ रहे हैं।

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