हाथी सज्जन जीव, उनको रास्ता दें मनुष्य : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली

तमिलनाडु के नीलगिरी वन क्षेत्र में अवैध रूप से बने रिसॉर्टस का मामला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो किसी को भी हाथी के रास्ते में आने नहीं देगा और मनुष्य को हाथियों को रास्ता देना ही चाहिए। तमिलनाडु के नीलगिरी वन क्षेत्र में अधिसूचित हाथियों के गलियारे में अवैध रूप से निर्मित रिसॉर्ट्स को सील करने से संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की पीठ ने ये टिप्पणी की।

रिज़ॉर्ट मालिकों द्वारा अपने रिसॉर्ट्स को सील करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखते हुए पीठ ने कहा कि वह हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पैनल नियुक्त करेगा जो याचिकाकर्ताओं (रिसॉर्ट मालिकों) की शिकायतों की जांच करेगा और क्षेत्र को खाली करने व मुआवजे पर भी विचार करेगा। पीठ ने पक्षकारों से पैनल के गठन के लिए सुझाव भी मांगे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “हाथी सज्जन है। वो विशाल और शक्तिशाली, लेकिन नाजुक होता है और वहां रहने वाले लोग हाथी को मारना चाहते हैं। हम नाजुक ईको सिस्टम के साथ काम कर रहे हैं। देखिए कि कैसे असम में गैंडों का शिकार किया जाता है।” मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “मनुष्य को हाथी को रास्ता देना चाहिए।” इस मामले में तीन जजों की पीठ द्वारा जल्द ही आदेश पारित करने की संभावना है।

गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने पिछले साल अगस्त में नीलगिरी पहाड़ियों में रिसॉर्ट्स को सील करने का आदेश दिया था, तब कलेक्टर ने हाथियों के गलियारे पर कथित अवैध निर्माणों पर एक रिपोर्ट सौंपी थी। सुनवाई के दौरान रिसॉर्ट मालिकों ने तर्क दिया कि उन्हें सभी अनुमति मिल गई थी।

हाईकोर्ट ने सभी रिसॉर्ट बंद करने को कहा था

1996 में ए रंगराजन द्वारा मूल रिट याचिका और एक्टिविस्ट एलिफेंट ‘राजेंद्रन और 2007-08 में एनजीओ नीलगिरी वाइडलाइफ प्रोटेक्शन द्वारा दो जनहित याचिका दाखिल की गई थीं। मद्रास हाईकोर्ट में दशकों से चल रही अदालती लड़ाई के बाद अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हैं। इन सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई है। हाईकोर्ट ने नीलगिरी हाथी गलियारे में सभी रिसॉर्ट को बंद करने का आदेश दिया था।

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