चीनी ऐप्स के इस्तेमाल को बंद करने को लेकर सरकार ने क्या कहा है

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। 

भारत और चीन के बीच सीमा पर विवाद जारी है। दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम स्तर पर है। ऐसे वक्त में देशभर में चीनी ऐप को हटाने की मुहिम शुरू हो गई है।

चीनी सैनिकों द्वारा धोखे से भारतीय जवानों पर हमला किए जाने और इसमें 20 जवानों के शहीद होने के बाद देश का गुस्सा चरम पर है। चीन की इस करतूत के बाद देश में चीनी उत्पादों के बहिष्कार करने की आवाज उठने लगी है।

चीनी ऐप को अपने मोबाइल से हटाने की मुहिम का सच

इस बीच चीनी ऐप को भी अपने मोबाइल से हटाने की मुहिम तेज हो गई है। इस बीच सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा बड़ा कदम उठाते हुए चीनी ऐप पर रोक लगाने की खबर वायरल हो रही है।

वायरल मैसेज में लिखा है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मिनिस्ट्री के नैशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर की ओर से चीन के ऐप्स का इस्तेमाल बंद करने का ऑर्डर दिया गया है। चाइनीज ऐप को गूगल प्ले स्टोर और ऐपल ऐप स्टोर पर भी रिस्ट्रिक्ट कर दिया जाएगा।

इस सूची में मोबाइल लीजेंड्स, क्लैश ऑफ किंग्स और गेल ऑफ सुल्तान्स जैसे लोगों के पसंदीदा गेम भी शामिल हैं। मैसेज में कहा गया है कि इन ऐप्स पर यूजर्स की प्राइवेसी को खतरा है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश फर्जी है

अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश फर्जी है और ऐसा कोई निर्देश गूगल या एप्पल को नहीं दिया गया है।

भारत और चीन के बीच लद्दाख में एलएसी पर बढ़ते तनाव और चीनी ऐप्स और उत्पादों पर बैन को लेकर सोशल मीडिया पर फैले गुस्से के दौरान ये फर्जी आदेश आया है।

पीआईबी के ऑफिशल ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर कहा गया है कि यह ऑर्डर पूरी तरह फेक है और ऐसे कोई भी आदेश भारत सरकार या मंत्रालय द्वारा किसी को नहीं दिए गए हैं।

शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने चीनी ऐप को अनइंस्टाल करने की मांग की थी

एक तरफ चीन जहां भारत के जरिये सालाना चार लाख करोड़ से ज्यादा की कमाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर हमेशा वह भारत को नुकसान पहुंचाने की हरकतों को अंजाम देता रहा है। इस बार भी गलवान घाटी में चीन ने ऐसी ही करतूत दोहराई है।

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