‘रोजनामचे’ में दर्ज होती परिवार की भावनाएं

संतोष शितोले | इंदौर

इंदौर पुलिस के हजारों जवान और अफसर इन दिनों 24 घंटे ड्यूटी पर हैं। वे दस दिनों से घर नहीं गए हैं, थानों में रोजनामचा भरने वाली पुलिस के घरों में बच्चे रोज मोबाइल पर कह रहे हैं, पापा ठीक से रहना…

पापा… आप कैसे हो? घर कब आओगे… आपकी बहुत याद आती है। आप अपना ध्यान रखना। सेनेटाइजर से हाथ धोते रहना। किसी के पास नहीं जाना। अपनी फिक्र रखना। समय पर खाना खा लेना और हां, दवाइयां समय पर जरूर ले लेना।

इन दिनों मोबाइल पर कुछ ऐसी ही बातें पुलिस महकमे में पदस्थ पुलिसकर्मियों-अधिकारियों और उनके बच्चों के बीच हो रही हैं। कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लगाए गए कर्फ्यू को करीब 10 दिन हो गए हैं। कांस्टेबल से लेकर टीआई तक सभी मैदानी तौर पर अपनी ड्यूटी दे रहे हैं और वह भी 12 से 18 घंटे। कारण कर्फ्यू को लेकर कसावट तो रखना है ही, लेकिन उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के साथ संक्रमण न फैले उससे आमजन, खुद को और अपने परिवार को बचाना है। पूरे जिले का बल इन दिनों व्यवस्था बनाए रखने में जुटा है।

सबसे ज्यादा कसावट और मशक्कत सेंट्रल कोतवाली टीआई बीडी त्रिपाठी, छत्रीपुरा टीआई आरएनएस भदौरिया, पंढरीनाथ टीआई रमेशचंद्र भास्करे, एमजी रोड टीआई राजेंद्र चतुर्वेदी, सराफा टीआई अमृता सोलंकी, चंदन नगर टीआई योगेश तोमर, खजराना टीआई संतोषसिंह यादव, सीएसपी डीके तिवारी, बीपीएस परिहार, एसकेएस तोमर, एसएस तोमर और उनकी टीम को करना पड़ रही है, क्योंकि इन अधिकारियों के सर्कल और थाना क्षेत्रों में कई लोग संक्रमित हो चुके हैं। यहां मेडिकल टीम पर हमले जैसी घटनाएं भी हो चुकी हैं। अधिकारियों से ज्यादा कांस्टेबल से लेकर एसआई तक लगातार व्यवस्था में जुटे हैं।

इस बीच पिछले हफ्ते आईजी विवेक शर्मा ने मातहतों को निर्देश दिए थे कि पुलिस विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों में अन्य विभागों की अपेक्षा कोरोना वायरस से संक्रमित होने की काफी अधिक आशंका है। आप लोगों के परिवार तो लॉकडाउन में हैं, परन्तु आप जब अपने परिवार में पहुंचते हैं तो परिजन को संक्रमित होने की प्रबल आशंका रहती है। इसके मद्देनजर आईजी ने सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को से अनुरोध किया कि वे यथासंभव ड्यूटी के बाद घर न जाएं और निर्धारित स्थानों पर ही एक-दूसरे से पर्याप्त सोशल डिस्टेंसिंग रखते हुए निवास करें।

इसका असर पिछले दिनों तब देखने को मिला जब तुकोगंज थाना टीआई निर्मल श्रीवास को उनकी दोनों मासूम बेटियां पारखी और आनी फोन लगाकर पूछती रहीं- पापा… घर कब आओगे? भोजन के लिए तो आ जाओ। खास बात यह कि टीआई का घर थाना परिसर स्थित सरकारी क्वार्टर में ही है, लेकिन कर्फ्यू में ड्यूटी और कोरोना का संक्रमण न फैले, आईजी के आदेश का पालन करने के मद्देनजर वे घर नहीं पहुंचे और दो दिन बाद गए तो घर के बाहर ही भोजन किया और उस दौरान बेटी को दूर रहने को कहा था। उस समय लिया गया फोटो रिश्तेदार ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। यह तो मात्र एक उदाहरण है। वर्तमान में कांस्टेबल से लेकर टीआई तक सभी की ऐसी ही स्थिति है और बच्चे रोज कई बार फोन लगाकर पूछते हैं कि पापा… घर कब आओगे?

ऐसी विषम परिस्थितियों में कर रहे कर्त्तव्यों का निर्वहन

एमआईजी थाने के पुलिसकर्मी ड्यूटी के बाद सजनप्रभा गार्डन स्थित कमरों में जाते हैं और बमुश्किल 5-6 घंटे आराम करते हैं। ऐसी ही स्थिति एमजी रोड, कोतवाली, छोटी ग्वालटोली, विजय नगर, भंवरकुआं आदि थाना स्टाफ की है, जो थाना क्षेत्र स्थित गेस्ट हाउस, होटल में (सोशल डिस्टेंसिंग) में रुकते हैं। कई तो ऐसे हैं कि खुद के हाथ और वस्तुएं कई बार सेनेटाइज कर तीन-चार दिन बाद होटल के रूम में नहाने के बाद घर जाकर खाना खा रहे हैं।

इन सभी परिस्थितियों के बीच पिछले दिनों जूनी इंदौर थाने के टीआई खुद कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए और उनका सैंपल लिया गया, जिसकी जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आई। तीन दिन से संयोगितागंज टीआई नरेंद्रसिंह रघुवंशी में भी ऐसे ही लक्षण दिख रहे हैं। सोमवार को उन्हें आइसोलेट किया गया, जबकि अभी रिपोर्ट आना बाकी है। सोमवार को परदेशीपुरा थाने में पदस्थ कांस्टेबल अबरार खान की सुबह गश्त करते समय मौत हो गई। अस्थमा के मरीज अबरार कोरोना और कर्फ्यू के बीच वे अपना कर्त्तव्य निभा रहे थे।

आईपीएस एसोसिएशन ने जताई गहरी चिंता, सभी एसपी को लिखा पत्र

मैदानी अमले की हकीकत जानने के बाद मध्यप्रदेश आईपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष और डीजी (एसएएफ) विजय यादव ने प्रदेश के सभी पुलिस एसपी को एक पत्र लिखा है कि यह समय मैदान में तैनात अमले का उत्साह बनाए रखने का है। फील्ड में जो पुलिसकर्मी काम कर रहे हैं, उन्हें प्रोत्साहित करते रहें। उनकी जरूरतों पर और कल्याण पर ध्यान दें। उनसे व्यक्तिगत बात करें और उनके परिवार का हाल-चाल भी जानें। पुलिस कप्तान होने के कारण यह जिम्मेदारी भी बनती है कि हम अपने फोर्स का मनोबल बढ़ाएं और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखें। उनकी सुरक्षा के उपाय करें। उन्हें बताएं कि वह अपने परिवार के साथ भी सुरक्षा प्रोटोकॉल का ध्यान रखें। पुलिस कर्मचारियों को सिर्फ संदेश नहीं भेजें, उनसे व्यक्तिगत चर्चा भी करें।

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