पहले पीपीई किट के लिये सस्पेंड किया अब कथित तौर पर सीएम के विरोध पर पुलिस ने जेल में डाल दिया

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि एक डॉक्टर जिन्हें अभी भगवान के रूप में देखा जा रहा है, उन्होंने विरोध जताने के लिए ऐसा रास्ता क्यों अपनाया जिसके कारण पुलिस को उन्हें हाँथ बांधकर ऑटो में डालना पड़ा।

दरअसल, नर्सिपटनम सरकारी अस्पताल में कोरोना मरीज़ों के इलाज के दौरान डॉक्टरों को सभी सुविधाएं नहीं होने से सरकार से पीपीई किट और N-95 मास्क मांग की थी। इस बारे में डॉक्टर सुधाकर ने मीडिया को भी जानकारी दी थी। उसके बाद इस विषय पर काफी चर्चा हुई। अस्पताल के अंदरूनी मामले को बाहर बता देने के आरोप में उन्हें सस्पेंड कर दिया गया, जिसके बाद से उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं चल रही है।

ये मामला आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम जिले के नर्सिपटनम इलाके का है। जहां एक डॉक्टर खाली बदन बीच सड़क पर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें वहां से उठाया और थाना ले गई। अब इस मामले में सियासत भी शुरू होने लगी है।

उन्होंने शनिवार को अचानक अपनी कार को सड़क किनारे लगाकर अपनी शर्ट उतार दी। शर्ट को कार में रख कर वह खाली बदन बीच सड़क पर विरोध प्रकट करते हुए सो गए। उन्होंने मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी के खिलाफ लगातार अनाप-शनाप बोलना जारी रखा।

एक सीनियर डॉक्टर के साथ इस तरह का बर्ताव दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं पुलिस कमिश्नर आरके मीणा का कहना है कि पुलिस कंट्रोल रूम को एक शिकायत मिली। इसमें बताया गया कि एक व्यक्ति हाइवे पर हंगामा कर रहा है। इस पर फॉर्थ टाउन थाना पुलिस को भेजा गया।

वहां पर हंगामा करने वाले व्यक्ति की पहचान डॉ. सुधाकर के रूप में हुई। उन्होंने शराब पी रखी थी। उन्होंने पुलिसवालों के साथ बदतमीजी की। एक कॉन्स्टेबल से उन्होंने मोबाइल छीन लिया और उसे सड़क पर फेंक दिया।

पुलिस का आरोप है कि शराब के नशे में डॉक्टर ने एक बाइक सवार को टक्कर भी मार दी। जब उन्हें रोका गया तो वे पुलिस से उलझ गए। उन्होंने सड़क पर खाना फेंक दिया। साथ ही अपनी शर्ट भी उतार दी और चिल्लाने लगे। बड़ी मुश्किल से उन्हें काबू किया गया।

पुलिस कमिश्नर ने कहा कि डॉक्टर से बदतमीजी करने वाले पुलिस कॉन्सटेबल को सस्पेंड कर दिया गया। साथ ही मामले की जांच के आदेश भी दिए गए हैं। वहीं डॉ. को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा गया है।


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